राजनांदगांव। जिले में 14 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ पूछताछ के नाम पर कथित अमानवीय व्यवहार की खबर ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। मामले को लेकर कांग्रेस नेता चुम्मन साहू ने भाजपा सरकार और राजनांदगांव पुलिस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “यह कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि प्रदेश की कानून व्यवस्था के गिरते स्तर और संवेदनहीन प्रशासन का भयावह चेहरा है। जिस पुलिस पर बेटियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, अगर वही एक नाबालिग बच्ची को रातभर थाने में बैठाकर मानसिक प्रताड़ना दे, अपमानजनक सवाल पूछे और उसे भय के माहौल में रखे, तो यह लोकतंत्र नहीं बल्कि प्रशासनिक क्रूरता है।”
चुम्मन साहू ने कहा कि “छत्तीसगढ़ पुलिस का ध्येय वाक्य ‘परित्राणाय साधुनाम’ सिर्फ बोर्ड और भाषणों तक सीमित रह गया है। प्रदेश की पुलिस क्या अब संरक्षण देने के बजाय भय और दबाव का प्रतीक बनती जा रही है? अगर अखबारों में प्रकाशित खबरें सही हैं, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि एक नाबालिग बच्ची की गरिमा और अधिकारों पर सीधा हमला है। ऐसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि सत्ता के संरक्षण में कुछ लोग वर्दी की मर्यादा भूल चुके हैं।”
उन्होंने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि “मंचों पर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और जमीनी हकीकत में बेटियों का अपमान — यही भाजपा सरकार का असली चेहरा बन चुका है। प्रदेश में सुशासन के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन सच यह है कि आम लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं और कई जगहों पर पीड़ित ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया जाता है। आखिर यह कैसा सुशासन है?”
चुम्मन साहू ने मांग की कि “यदि इस मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल निलंबित कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। केवल विभागीय जांच और खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा। एक मासूम बच्ची की मानसिक स्थिति और सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।”
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि “अगर पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला और दोषियों को बचाने की कोशिश की गई, तो कांग्रेस पार्टी सड़क से सदन तक बड़ा आंदोलन करेगी। बेटियों के सम्मान के मुद्दे पर चुप बैठना कायरता होगी, और अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद की जाएगी।”
