दो रातों में हाथियों का कहर: 8 घर ढहाए, धान की फसल और नर्सरी रौंदी

 रायगढ़। धरमजयगढ़ वन मंडल में भोजन की तलाश में जंगल से निकले हाथियों के दल ने ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार दूसरी रात भी भारी तबाही मचाई। दो दिनों के भीतर 8 ग्रामीणों के घर क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि किसानों की धान की खड़ी फसल और थरहा (नर्सरी) भी हाथियों के पैरों तले रौंद दी गई।

वन विभाग के अनुसार कापू रेंज के लिप्ती बीट अंतर्गत चितामाड़ा, पखनाकोट और कमरई गांवों में सोमवार रात हाथियों ने बैसाखु लकड़ा, संजय लकड़ा, दीपक केरकेट्टा, परमेश्वर मिंज, सिरिल मिंज सहित अन्य ग्रामीणों के मकानों को नुकसान पहुंचाया। इसके बाद मंगलवार रात पखनाकोट में भूखन मिंज और परसराम मिंज के घर भी हाथियों के हमले का शिकार हो गए। साथ ही किसानों की धान की नर्सरी और फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा।

घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और क्षति का सर्वे शुरू कर दिया। प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग ने ग्रामीणों से रात के समय सतर्क रहने और हाथियों की गतिविधियों की सूचना तत्काल वन अमले को देने की अपील की है।

 जिले में 135 हाथियों की मौजूदगी

वन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार रायगढ़ जिले में इस समय कुल 135 हाथी अलग-अलग दलों में विचरण कर रहे हैं। इनमें 114 हाथी धरमजयगढ़ वन मंडल में तथा 21 हाथी रायगढ़ वन मंडल में सक्रिय हैं। हाथियों की लगातार बढ़ती आवाजाही से ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

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