16-17 जुलाई को निकलेगी रायगढ़ की ऐतिहासिक रियासतकालीन श्री जगन्नाथ रथयात्रा

दो दिवसीय परंपरा बनेगी आस्था का केंद्र, तैयारियां पूरी; हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद

 

रायगढ़। शहर की ऐतिहासिक एवं रियासतकालीन श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव-2026 के आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 16 एवं 17 जुलाई को भगवान श्री जगन्नाथ, बड़े भाई श्री बलभद्र एवं बहन देवी सुभद्रा पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे। आयोजन के दौरान हजारों श्रद्धालु महाप्रभु के दर्शन कर रथ खींचने का पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे।

 

श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट, उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति एवं राजपरिवार रायगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस महोत्सव के लिए रथ की मरम्मत, रंग-रोगन, सजावट एवं अंतिम परीक्षण पूरा कर लिया गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात प्रबंधन तथा धार्मिक अनुष्ठानों के सुचारु संचालन के लिए भी व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।

 

रियासतकालीन विरासत का प्रतीक है श्री जगन्नाथ मंदिर

 

मंदिर ट्रस्ट के प्रबंध ट्रस्टी दिनेश कुमार षड़ंगी ने बताया कि रायगढ़ का श्री जगन्नाथ मंदिर रियासतकालीन आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। जनश्रुतियों के अनुसार रायगढ़ रियासत के तत्कालीन नरेश महाराज भूपदेव सिंह ने जगन्नाथपुरी धाम से प्रेरणा प्राप्त करने के बाद इस मंदिर की स्थापना कराई थी। तभी से यह मंदिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

 

उन्होंने बताया कि रायगढ़ घराना, जिसे महाराज चक्रधर सिंह के नाम से विश्वभर में पहचान मिली, भारतीय शास्त्रीय कथक की अमूल्य धरोहर है। वहीं श्री जगन्नाथ मंदिर उड़ीसा और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपराओं के अद्भुत समन्वय का प्रतीक माना जाता है।

 

'सोना भेष' है मंदिर की विशेष पहचान

 

दिनेश कुमार षड़ंगी ने बताया कि रायगढ़ का श्री जगन्नाथ मंदिर छत्तीसगढ़ का ऐसा प्रमुख मंदिर माना जाता है, जहां भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का 'सोना भेष' किया जाता है। पुरी की परंपरा के अनुरूप भगवान को शुद्ध स्वर्णाभूषणों से अलंकृत करने की यह परंपरा कई दशकों से निरंतर निभाई जा रही है।

 

देश में अनूठी है रायगढ़ की दो दिवसीय रथयात्रा

 

उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश मिश्रा ने बताया कि रथयात्रा के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन और महाप्रसाद वितरण सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से बड़ी संख्या में शामिल होकर आयोजन की गरिमा बनाए रखने की अपील की।

 

समिति के मीडिया प्रभारी अधिवक्ता आकाश कुमार मिश्रा ने बताया कि रायगढ़ की रथयात्रा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दो दिवसीय परंपरा है। पहले दिन 16 जुलाई को भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रथ पर विराजमान कराया जाएगा और रथ विमला माता मंदिर एवं मां समलेश्वरी मंदिर के समीप रहेगा। इसके बाद 17 जुलाई को महाप्रभु की भव्य रथयात्रा मौसी मां के घर अर्थात गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेगी।

 

उन्होंने कहा कि यह परंपरा रायगढ़ की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय प्रतीक है, जिसे पीढ़ियों से श्रद्धा और वैदिक मर्यादाओं के साथ निभाया जा रहा है।

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