अदानी विस्थापन विवाद फिर भड़का: वादाखिलाफी पर विधायक की सीधी चेतावनी

Anp News Live, korba कोरबा जिले में भू-विस्थापितों का मुद्दा एक बार फिर सुलग उठा है और अब यह राजनीतिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है। रामपुर विधानसभा के विधायक फूल सिंह राठिया ने कलेक्टर को कड़ा पत्र लिखकर साफ चेतावनी दी है कि यदि कंपनी द्वारा किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन अपरिहार्य होगा।

विधायक ने अपने पत्र में कोरबा पावर लिमिटेड (अदानी) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2011-12 में जमीन अधिग्रहण के दौरान प्रत्येक खातेदार को नौकरी देने का वादा किया गया था। लेकिन हाल ही में हुई जिला पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना समिति (DRRC) की बैठक में एक परिवार को केवल एक नौकरी देने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे प्रभावित गांवों—खोड्डल, पताढ़ी, पहंदा, सरगबुंदिया, कुदुरमाल और ढनढनी—में भारी आक्रोश है।

पुराने वादे अधूरे, बढ़ता असंतोष

मामला केवल हालिया वादाखिलाफी तक सीमित नहीं है। वर्ष 2004-05 में हुए त्रिपक्षीय समझौते में 330 लोगों को स्थायी रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज भी कई पात्र लोग नौकरी का इंतजार कर रहे हैं। इससे प्रशासन और कंपनी दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

नई मांगों से बढ़ा दबाव

ग्रामीणों ने अब अपनी मांगों का दायरा बढ़ाते हुए भूमिहीन और अप्रभावित लोगों को भी प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने की मांग की है। इससे साफ है कि यह मुद्दा अब व्यापक सामाजिक असंतोष का रूप ले चुका है।

 नियमों की अनदेखी के आरोप

इकाई 3, 4, 5 और 6 के लिए जमीन अधिग्रहण के बावजूद प्रभावितों को न नौकरी मिली और न ही निर्धारित भत्ता। नियमों के अनुसार 3 वर्ष 6 माह के भीतर रोजगार न देने पर भत्ता देना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां दोनों ही व्यवस्थाएं ठप बताई जा रही हैं।

आंदोलन की चेतावनी

विधायक राठिया ने साफ कहा है कि यदि प्रत्येक खातेदार को स्थायी नौकरी नहीं दी गई, तो वे जनप्रतिनिधियों, यूनियनों और ग्रामीणों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करेंगे। उनके इस बयान के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

 यूनियन का आरोप

भू-स्थापित मजदूर संघ के अध्यक्ष प्रवीण ओगरे ने कंपनी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि क्षेत्रवासियों के साथ धोखा किया गया है और उनके अधिकारों के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

कोरबा में विस्थापन का यह मुद्दा अब सिर्फ मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संघर्ष का रूप ले चुका है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह विवाद बड़े जनआंदोलन में बदल सकता है।

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