कोरबा जिले के उरगा थाना क्षेत्र के उमरेली गांव के युवक जगदीश प्रजापति की हत्या का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। युवक की लाश जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत खरखोद गांव में मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। फिलहाल पामगढ़ पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और जल्द खुलासे की उम्मीद जताई जा रही है।
29 अप्रैल 2026 — यही वो दिन था जब जगदीश प्रजापति अपने परिवार के साथ उमरेली से अपने ससुराल खरखोद गांव एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए रवाना हुआ। घर में हल्दी की रस्म चल रही थी, माहौल खुशियों का था… लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि ये खुशी मातम में बदल जाएगी।
रात 11:45 बजे — मृतक के छोटे भाई कालेश्वर प्रजापति के पास एक कॉल आता है। कॉल करने वाली बताई जा रही है मृतक की पत्नी दिव्या प्रजापति। आरोप है कि उसने फोन पर कहा— “तुम्हारे भाई को मरवा दूंगी, झगड़ा कर रहा है… कल अपने समाज को लेकर हमारे गांव आना।”
हालांकि इस कॉल की रिकॉर्डिंग मौजूद नहीं है, लेकिन परिजनों के पास 1 मिनट 22 सेकंड की कॉल का स्क्रीनशॉट है।
30 अप्रैल, सुबह 11 बजे — फिर एक कॉल आता है, इस बार जगदीश के पिता को… बताया जाता है कि “आपका बेटा घर में नहीं है, आकर खोजने में मदद करें।”
परिजन दोपहर 1 बजे खरखोद के लिए रवाना होते हैं और वहां पहुंचकर बहू व नाती से मिलते हैं। नाती (करीब 1 साल का बच्चा) घर में ही मिलता है, लेकिन जगदीश का कोई सुराग नहीं।
1 मई — अचानक एक बैनर वायरल होता है जिसमें लिखा होता है कि “जगदीश प्रजापति अपने बच्चे के साथ लापता है।”
जबकि हकीकत ये थी कि बच्चा घर पर सुरक्षित था। इससे मामला और संदिग्ध हो गया।
3 मई — परिजन उरगा थाना पहुंचते हैं, जहां से उन्हें पामगढ़ थाना भेज दिया जाता है।
परिजन पामगढ़ के लिए रवाना होते हैं, लेकिन रास्ते में ही सिवनी-चांपा के पास उन्हें पुलिस का फोन आता है…
शाम 4 बजे — फोन पर खबर मिलती है… “आपका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है…”
यह सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है।
खरखोद गांव पहुंचने पर परिजन जो देखते हैं, वो रूह कंपा देने वाला था—
शादी वाले घर से महज 300-500 मीटर दूर जगदीश की लाश पड़ी थी। शव सड़ना शुरू हो चुका था, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि हत्या 29 या 30 अप्रैल की रात ही कर दी गई थी।
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ…
पोस्टमार्टम के दौरान परिजनों से ₹7000 की मांग की गई। जब उन्होंने सवाल उठाया तो बताया गया कि “अस्पताल शासकीय है, लेकिन कर्मचारी प्राइवेट हैं, इसलिए शुल्क देना पड़ेगा।”
यह आरोप सिस्टम पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।
अंतिम संस्कार उमरेली गांव में किया गया, जिसमें ससुराल पक्ष भी शामिल हुआ।
इसके बाद पामगढ़ पुलिस मृतक के घर पहुंची और पत्नी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल:
आखिर शादी के माहौल में मौत का खेल किसने खेला?
कॉल पर दी गई धमकी क्या सच थी?
लापता का झूठा बैनर किसने और क्यों फैलाया?
और पोस्टमार्टम के नाम पर वसूली… क्या ये सिस्टम की सच्चाई है?
