नशे और लड़ाई-झगड़े की गिरफ्त में पहुंच गया था मासूम, पुलिस ने संरक्षण में लेकर कराया पुनर्वास
राजनांदगांव: एक 10 वर्षीय नाबालिग बालक, जिसने कम उम्र में ही पिता को खो दिया और मां के छोड़कर चले जाने के बाद अकेले जीवन गुजारने को मजबूर हो गया। हालात ऐसे बने कि मासूम धीरे-धीरे नशे और लड़ाई-झगड़े की ओर बढ़ गया। लेकिन एक घटना के बाद जब यह मामला डोंगरगढ़ पुलिस के सामने आया तो पुलिस ने सिर्फ कानूनी कार्रवाई तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि बालक के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी भी उठाई।
ऐसे सामने आया मामला
9 अगस्त 2026 को चमगेंदरी पारा निवासी एक व्यक्ति ने थाना डोंगरगढ़ में शिकायत दर्ज कराई कि उसका नाबालिग पुत्र हाई स्कूल ग्राउंड में खेलने गया था। इसी दौरान करीब 10 वर्षीय बालक ने उसके पुत्र को आहत कर दिया। शिकायत पर पुलिस ने रोजनामचा सान्हा में रिपोर्ट दर्ज कर बालक को संरक्षणात्मक अभिरक्षा में लिया।
पूछताछ में सामने आई मासूम की दर्दनाक कहानी
पुलिस द्वारा जानकारी जुटाने पर पता चला कि बालक के पिता की कई वर्ष पूर्व हत्या हो चुकी है। वहीं उसकी मां भी उसे छोड़कर कहीं चली गई। परिवार का कोई सहारा नहीं होने के कारण बालक घर में अकेले रहने लगा था। इसी दौरान वह नशे और लड़ाई-झगड़े की आदत की ओर बढ़ गया।
एसपी ने लिया संज्ञान, शुरू हुई नई पहल
बालक की स्थिति की जानकारी पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा के संज्ञान में आने पर उन्होंने उसके सर्वोत्तम हित और भविष्य को ध्यान में रखते हुए उचित व्यवस्था के निर्देश दिए। एसपी ने ऐसी जगह व्यवस्था करने के निर्देश दिए, जहां बालक को सुरक्षित वातावरण, रहने-खाने की सुविधा और नशे की लत से बाहर आने के लिए आवश्यक सहायता मिल सके।
बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया
निर्देश के बाद डोंगरगढ़ डीएसपी प्रोबेशनर एवं थाना प्रभारी सुश्री सुमन जायसवाल ने बालक को न्यायालय/बाल कल्याण समिति, राजनांदगांव के समक्ष प्रस्तुत किया। आवश्यक काउंसलिंग एवं वैधानिक प्रक्रिया पूरी कराई गई।
रायपुर के नशामुक्ति केंद्र में कराया दाखिल
बालक के बेहतर भविष्य और पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए उसे नई उम्मीद नशा मुक्ति केंद्र, रायपुर में दाखिल कराया गया। यहां बालक को सुरक्षित वातावरण के साथ नशे की लत से बाहर आने और सामान्य जीवन की ओर लौटने के लिए आवश्यक सहयोग मिलेगा।
पुलिस की कार्रवाई बनी मानवीय पहल
डोंगरगढ़ पुलिस की यह कार्रवाई केवल अपराध अथवा शिकायत की वैधानिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रही। पुलिस ने एक ऐसे बच्चे के भविष्य की चिंता की, जो बेहद कम उम्र में माता-पिता का सहारा खो चुका था। बालक को संरक्षण, सुधार और पुनर्वास की दिशा में ले जाने की यह पहल पुलिस की मानवीय संवेदनशीलता को सामने लाती है।
मार्गदर्शन एवं सराहनीय योगदान
पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री कीर्तन राठौर एवं एसडीओपी डोंगरगढ़ श्री केशरी नंदन नायक के दिशा-निर्देशन में कार्रवाई की गई। प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक एवं थाना प्रभारी डोंगरगढ़ सुश्री सुमन जायसवाल, सहायक उप निरीक्षक मुजीब रहमान कुरैशी एवं आरक्षक नरेंद्र प्रजापति का इस कार्यवाही में सराहनीय योगदान रहा।
