फोटो-वीडियो आए सामने स्कूल परिसर से कबाड़ी वाहन में लोड कर भेजी गईं सरकारी पुस्तकें
एक शिक्षिका बिना आवेदन दिए हुई रवाना, दूसरी पहुंची देरी से शिक्षा विभाग की निगरानी पर उठे गंभीर सवाल
छुरिया। विकासखंड छुरिया अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला लालूटोला में शिक्षकों की कथित मनमानी और लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। विद्यालय में रखी पुरानी सरकारी पुस्तकों को बेचने के लिए बाकायदा कबाड़ी की गाड़ी स्कूल परिसर में बुलवाई गई और पुस्तकों को वाहन में लोड कराकर बाहर भेज दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के फोटो और वीडियो भी मौजूद हैं।
मामला सामने आने के बाद सरकारी शैक्षणिक सामग्री के निस्तारण, विद्यालय प्रबंधन की जवाबदेही और शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
फोटो-वीडियो मौजूद, अब सवाल—किसकी अनुमति से बेची गईं सरकारी पुस्तकें?

जानकारी के अनुसार, प्राथमिक शाला लालूटोला में रखी पुरानी सरकारी पुस्तकों को कबाड़ी वाहन में लोड कराकर भेजा गया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन सरकारी पुस्तकों को बेचने के लिए सक्षम अधिकारी से पूर्व अनुमति ली गई थी? क्या पुस्तकों को नियमानुसार अनुपयोगी घोषित किया गया था? क्या उनकी सूची तैयार की गई थी? क्या कोई पंचनामा बनाया गया और निर्धारित विभागीय प्रक्रिया का पालन किया गया?
यदि सरकारी पुस्तकों को बेचा गया है तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कुल कितनी पुस्तकें बेची गईं, उनका वजन कितना था, किस दर पर सौदा हुआ, कितनी राशि प्राप्त हुई और वह राशि आखिर कहां जमा की गई?
कबाड़ी की गाड़ी किसने बुलाई, कितने में हुआ सौदा?
इस मामले में कई गंभीर सवाल जवाब मांग रहे हैं। कबाड़ी की गाड़ी किसके निर्देश पर विद्यालय पहुंची? सरकारी पुस्तकों को बेचने का निर्णय किसने लिया? क्या खंड शिक्षा अधिकारी अथवा किसी अन्य सक्षम अधिकारी से लिखित अनुमति ली गई थी? क्या स्कूल प्रबंधन समिति को इसकी जानकारी थी? क्या एसएमसी की बैठक में इस संबंध में कोई प्रस्ताव पारित किया गया था?
यदि सरकारी पुस्तकों को बिना सक्षम अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बेचा गया है, तो यह गंभीर प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितता का विषय हो सकता है।
एक शिक्षिका बिना आवेदन दिए स्कूल से गई, दूसरी पहुंची देरी से
मामला केवल सरकारी पुस्तकों की कथित बिक्री तक सीमित नहीं है। शनिवार के दिन विद्यालय की एक शिक्षिका बिना कोई लिखित आवेदन दिए स्कूल से चली गई, जबकि दूसरी शिक्षिका निर्धारित समय से देरी से विद्यालय पहुंची।ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब शिक्षक ही विद्यालयीन समय और अनुशासन का पालन नहीं करेंगे, तो बच्चों की नियमित पढ़ाई और विद्यालय की व्यवस्था आखिर किसके भरोसे चलेगी? इस मामले में विद्यालय की उपस्थिति पंजी, अवकाश आवेदन और अन्य संबंधित अभिलेखों की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
फोटो-वीडियो के साथ अभिलेखों की जांच भी जरूरी
इस पूरे घटनाक्रम के फोटो और वीडियो उपलब्ध होने से मामला और गंभीर हो गया है। विभागीय जांच में फोटो-वीडियो के साथ विद्यालय के स्टॉक रजिस्टर, पुस्तक वितरण पंजी, अनुपयोगी पुस्तकों की सूची, निस्तारण की अनुमति, एसएमसी की कार्यवाही पंजी, बिक्री की रसीद और प्राप्त राशि के हिसाब की जांच की जानी चाहिए।
इसके साथ ही कबाड़ी वाहन का नंबर, कबाड़ी संचालक का नाम, पुस्तकों का वजन और भुगतान संबंधी जानकारी की जांच से पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है।
अब शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर नजर
अब बड़ा सवाल यह है कि फोटो-वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग क्या कार्रवाई करता है? क्या खंड शिक्षा अधिकारी तत्काल विद्यालय पहुंचकर मामले की जांच करेंगे? क्या संबंधित अभिलेखों की जांच की जाएगी? क्या जिम्मेदार शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा?
यदि जांच में बिना अनुमति सरकारी पुस्तकों की बिक्री और ड्यूटी के दौरान अनुशासनहीनता प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है—शासकीय प्राथमिक शाला लालूटोला में कबाड़ी की गाड़ी किसने बुलवाई? पुरानी सरकारी पुस्तकें किसकी अनुमति से बेची गईं? बिक्री से कितनी रकम मिली और वह रकम आखिर कहां गई? फोटो-वीडियो मौजूद होने के बाद अब शिक्षा विभाग की जांच और कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
