480 पौवा शराब की जब्ती पर बड़ा रहस्य! आखिर किस ठिकाने से मिली शराब, आबकारी विभाग ने क्यों साधी चुप्पी?

 

छुरिया। गैंदाटोला में आबकारी विभाग द्वारा 480 पौवा महाराष्ट्र निर्मित अवैध शराब जब्त किए जाने की कार्रवाई अब नए सवालों के केंद्र में आ गई है। विभाग ने एक आरोपी के विरुद्ध आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की जानकारी दी है, लेकिन जिस सबसे महत्वपूर्ण तथ्य का खुलासा होना चाहिए था, वह अब तक सामने नहीं आया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 480 पौवा शराब किस जगह से जब्त हुई?

480 पौवा शराब की बरामदगी कोई सामान्य कार्रवाई नहीं मानी जा सकती। इतनी बड़ी मात्रा में शराब का भंडारण किसी मकान, गोदाम, दुकान, परिसर या अन्य सुरक्षित स्थान पर ही संभव होता है। इसके बावजूद आबकारी विभाग ने बरामदगी स्थल की जानकारी सार्वजनिक नहीं की। इससे पूरे मामले की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।

सबसे हैरानी की बात यह है कि आबकारी विभाग आमतौर पर हर बड़ी कार्रवाई के बाद विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी करता है, जिसमें कार्रवाई का स्थान, आरोपी का नाम, जब्त सामग्री और कानूनी कार्रवाई का पूरा विवरण होता है। लेकिन इस मामले में विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं होने से लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इस मामले में ऐसा क्या था, जिसे सार्वजनिक नहीं किया गया।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी थी, तो बरामदगी स्थल की जानकारी सार्वजनिक करने में संकोच क्यों किया गया? यदि शराब किसी मकान, दुकान, गोदाम या अन्य परिसर से बरामद हुई थी, तो उस स्थान का नाम सामने क्यों नहीं आया? यदि किसी अन्य व्यक्ति की कोई भूमिका नहीं है, तो विभाग इस संबंध में स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता?

ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में महाराष्ट्र निर्मित शराब का अवैध कारोबार किसी एक व्यक्ति तक सीमित होना कठिन प्रतीत होता है। ऐसे में यह जानना भी आवश्यक है कि क्या आबकारी विभाग केवल एक आरोपी तक कार्रवाई सीमित रखेगा या पूरे नेटवर्क की भी जांच करेगा। यदि शराब किसी भवन या परिसर से बरामद हुई है, तो उस स्थान के मालिक, संचालक अथवा संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ हुई या नहीं, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

अब क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि इस मामले में विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी क्यों नहीं की गई। क्या यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था या इसके पीछे कोई अन्य कारण है? जब विभाग सामान्यतः हर बड़ी कार्रवाई की जानकारी मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक करता है, तो इस मामले में अलग तरीका क्यों अपनाया गया?

जनता अब आबकारी विभाग से स्पष्ट जवाब चाहती है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर 480 पौवा शराब किस जगह से जब्त हुई? बरामदगी स्थल का नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति क्यों जारी नहीं हुई? क्या उस स्थान के मालिक या संचालक की भूमिका की भी जांच की गई? और क्या कार्रवाई पूरे नेटवर्क तक पहुंचेगी या फिर केवल एक आरोपी तक ही सीमित रह जाएगी?

इन सवालों का जवाब अब केवल आबकारी विभाग ही दे सकता है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि बड़ी कार्रवाई के साथ बड़ी पारदर्शिता भी जरूरी है। यदि विभाग पूरे मामले के तथ्यों, बरामदगी स्थल और जांच की स्थिति को सार्वजनिक करता है, तो इससे जनता के मन में उठ रहे संदेह दूर होंगे और कार्रवाई की निष्पक्षता पर विश्वास भी मजबूत होगा। जब तक इन सवालों पर आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक गैंदाटोला की 480 पौवा शराब जब्ती की यह कार्रवाई चर्चा और सवालों के केंद्र में बनी रहेगी।

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