जांजगीर-चांपा। जिले के ग्राम पंचायत मुनुंद में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत गंभीर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि करीब 5 से 7 आवास ऐसे हैं, जिनका निर्माण वास्तविक रूप से नहीं हुआ, लेकिन दस्तावेजों में उन्हें पूर्ण दर्शाकर राशि निकाली जा चुकी है। मामले के सामने आने के बाद पंचायत में जिम्मेदारी को लेकर विवाद की स्थिति बन गई है।
रोजगार सहायक और सरपंच आमने-सामने
स्थानीय लोगों के अनुसार, जब मामले की जानकारी लेने मीडिया टीम गांव पहुंची, तो रोजगार सहायक ने इसके लिए सरपंच को जिम्मेदार बताया, जबकि सरपंच ने आरोपों की जिम्मेदारी रोजगार सहायक पर डाल दी। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों से मामला और अधिक गंभीर हो गया है।
मौके पर नहीं मिला निर्माण कार्य
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के अनुसार, जिन आवासों को रिकॉर्ड में तैयार बताया गया है, उनमें से कई स्थानों पर निर्माण कार्य दिखाई नहीं दिया। मीडिया टीम द्वारा संबंधित CH ID की जांच करने पर यह दावा किया गया कि हितग्राही जिस घर में रह रहा है, उस घर की जियो टैगिंग नहीं की गई, बल्कि किसी अन्य स्थान की लोकेशन दर्ज दिखाई दे रही है।
जियो टैगिंग पर उठे गंभीर सवाल
यदि जांच में यह पाया जाता है कि किसी अन्य स्थान की फोटो या लोकेशन अपलोड कर भुगतान प्राप्त किया गया है, तो यह प्रधानमंत्री आवास योजना के नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बिना वास्तविक निर्माण के ही दस्तावेजों में प्रगति दर्शाकर राशि निकाली गई।
ग्रामीणों ने की जांच की मांग
गांव के लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अनियमितता सिद्ध होती है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रशासन के संज्ञान में पहुंचा मामला
मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को मीडिया के माध्यम से दे दी गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच के बाद क्या कार्रवाई करता है।
