कोंडागांव, 11 जुलाई 2026 | बस्तर विकास एवं सेवा संस्थान द्वारा संचालित बस्तर संस्कृति ग्रुप (लोकरंग) के संयोजक सिद्धार्थ महाजन ने मुख्यमंत्री के नाम पत्र भेजकर राज्य के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, लोककलाओं और स्थानीय त्योहारों को शिक्षा से जोड़ने की मांग की है। पत्र की प्रतिलिपि स्कूल शिक्षा मंत्री को भी भेजी गई है।
पत्र में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध लोक संस्कृति, जनजातीय विरासत, लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक रीति-रिवाजों के लिए देशभर में विशिष्ट पहचान रखता है। लेकिन बदलती जीवनशैली और मोबाइल संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के कारण नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होती जा रही है। ऐसे में विद्यालय स्तर पर सांस्कृतिक शिक्षा को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।
सिद्धार्थ महाजन ने सुझाव दिया है कि विद्यालयों में हरेली, पोला, तीजा, छेरछेरा, मड़ई, बस्तर दशहरा, नवाखाई और गोंचा जैसे प्रमुख त्योहारों की जानकारी विद्यार्थियों को दी जाए। साथ ही पंथी, राउत नाचा, सुआ, करमा, गेंड़ी, पंडवानी, ददरिया, लोकगीत, ढोकरा शिल्प, बांस एवं लकड़ी की हस्तकलाओं तथा जनजातीय संस्कृति का व्यावहारिक परिचय भी कराया जाए।
पत्र में यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि विद्यार्थियों में देशभक्ति और सामाजिक चेतना विकसित करने के लिए छत्तीसगढ़ एवं देश के वीर शहीदों तथा महान विभूतियों के जीवन पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
इसके अलावा प्रत्येक विद्यालय में प्रतिमाह "अपनी संस्कृति–अपनी पहचान" विषय पर सांस्कृतिक परिचय कार्यक्रम, लोक कलाकारों के व्याख्यान, लोक कला प्रदर्शनियां, सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं और जनजातीय संस्कृति आधारित गतिविधियां आयोजित करने की मांग की गई है।
सिद्धार्थ महाजन का कहना है कि इस पहल से विद्यार्थियों में अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक संरक्षण की भावना मजबूत होगी। उन्होंने राज्य शासन से पूरे प्रदेश के विद्यालयों में नियमित सांस्कृतिक गतिविधियां प्रारंभ करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।
