बजट स्वीकृति की मांग को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की तैयारी
अब कलम बनेगी जनता की सबसे बड़ी आवाज और जनहित की इस लड़ाई को मिलेगा निर्णायक अंजाम
प्रयास कैवर्त संवाददाता गौरेला पेंड्रा मरवाही
गौरेला। आठ वर्षों से सरकारी फाइलों में धूल फांक रही पेंड्रा बायपास परियोजना अब केवल एक अधूरी सड़क नहीं, बल्कि व्यवस्था की सुस्ती, प्रशासनिक उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता का प्रतीक बन चुकी है। करोड़ों रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास हुए वर्षों बीत गए, लागत दोगुनी हो गई, किसानों की जमीन अधिग्रहित हो गई, शहर का यातायात बदहाल हो गया, सड़क दुर्घटनाओं में कई परिवार उजड़ गए, लेकिन निर्माण कार्य आज भी शुरू नहीं हो सका।
इसी गंभीर जनहित के मुद्दे पर अब जिला प्रेस क्लब गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ने निर्णायक संघर्ष का शंखनाद कर दिया है। गौरेला में आयोजित आवश्यक बैठक में पत्रकारों ने स्पष्ट घोषणा की कि अब पेंड्रा बायपास का मुद्दा केवल खबर नहीं रहेगा, बल्कि जनआंदोलन का स्वर बनेगा। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की जिम्मेदारी निभाते हुए पत्रकार अपनी कलम के माध्यम से जनता की आवाज शासन और सत्ता के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाएंगे।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से शीघ्र मुलाकात कर परियोजना के लिए तत्काल बजट स्वीकृत करने की मांग की जाएगी। साथ ही जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार तक विस्तृत ज्ञापन भेजकर क्षेत्रवासियों की वर्षों पुरानी मांग और जनभावनाओं से अवगत कराया जाएगा।
जिला प्रेस क्लब अध्यक्ष असद सिद्दीकी ने कहा कि 24 सितंबर 2018 को तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने लगभग 13 किलोमीटर लंबे पेंड्रा बायपास का शिलान्यास किया था। उस समय इसे जिले के विकास का नया अध्याय बताया गया था, लेकिन आठ वर्ष बाद भी यह परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी। उन्होंने कहा कि जब विकास केवल घोषणाओं तक सीमित रह जाए और जनता को उसका लाभ न मिले, तब सवाल उठाना लोकतंत्र का अधिकार ही नहीं, बल्कि कर्तव्य भी बन जाता है।
जिला प्रेस क्लब सचिव योगेंद्र नहरेल ने बताया कि वर्ष 2018 में लगभग 54.25 करोड़ रुपये की स्वीकृत परियोजना की लागत अब बढ़कर करीब 105 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। भूमि अधिग्रहण की प्रारंभिक लागत 10.58 करोड़ रुपये से बढ़कर 54.71 करोड़ रुपये हो चुकी है। आठ वर्षों की देरी ने सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ डाल दिया, लेकिन निर्माण कार्य की एक ईंट तक नहीं रखी जा सकी।
उपाध्यक्ष सत्यनारायण पांडेय ने कहा कि परियोजना के लिए 286 किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई, लेकिन अधिकांश किसानों को आज तक पूर्ण मुआवजा नहीं मिल पाया। उनकी जमीन वर्षों से उपयोगहीन पड़ी है। किसान न खेती कर पा रहे हैं, न जमीन बेच पा रहे हैं और न ही अपने भविष्य की कोई योजना बना पा रहे हैं। कई किसान आर्थिक संकट और बैंक ऋण के बोझ तले दब चुके हैं।
कोषाध्यक्ष ज्ञान शर्मा ने कहा कि बायपास के अभाव में राष्ट्रीय राजमार्ग-130 का पूरा भारी यातायात आज भी पेंड्रा नगर के बीचोंबीच से गुजरता है। स्कूल, अस्पताल, कॉलेज और बाजारों के सामने से दिन-रात दौड़ते भारी वाहन हर पल किसी बड़े हादसे की आशंका पैदा करते हैं। नागरिक भय के माहौल में जीवन जीने को विवश हैं।
संयुक्त सचिव अजीत गहलोत ने कहा कि वर्षों की देरी ने केवल विकास को नहीं रोका, बल्कि अनेक सड़क दुर्घटनाओं में निर्दोष लोगों की जान भी ली है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर इतने गंभीर जनहित के विषय पर आठ वर्षों में ठोस राजनीतिक इच्छाशक्ति क्यों दिखाई नहीं दी? उन्होंने कहा कि अब जिला प्रेस क्लब इस मुद्दे को लगातार उठाएगा और तब तक उठाएगा, जब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो जाता।
बैठक में मौजूद पत्रकारों ने एक स्वर में कहा कि पेंड्रा बायपास किसी दल या राजनीति का विषय नहीं, बल्कि जनता के जीवन, किसानों के अधिकार, सड़क सुरक्षा और जिले के भविष्य से जुड़ा सवाल है। यदि अब भी शासन और संबंधित विभागों ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो जिला प्रेस क्लब लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर रहकर व्यापक जनजागरण अभियान चलाएगा और जनहित की इस लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने का हरसंभव प्रयास करेगा।
बैठक में जिला प्रेस क्लब अध्यक्ष असद सिद्दीकी, सचिव योगेंद्र नहरेल, उपाध्यक्ष सत्यनारायण पांडेय, कोषाध्यक्ष ज्ञान शर्मा, संयुक्त सचिव अजीत गहलोत सहित मुरारी रैदास, अमित तिवारी, उमेश अग्रवाल, संतोष नामदेव, गौरव जैन, तापस शर्मा, सुहैल आलम, वीरेंद्र पांडेय, तनवीर आलम, प्रयास कैवर्त, सूरज यादव, राकेश राजपूत एवं बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे।
"अब सवाल सिर्फ बायपास का नहीं, जनता के विश्वास का है। आठ वर्षों का इंतजार बहुत हो चुका... अब जनहित की आवाज़ को अनसुना करना आसान नहीं होगा।"
