साप्ताहिक बैठकों से नदारद आरईओ पर गिरी गाज, दो माह का वेतन रोका, किसानों से दूरी, कार्यक्षेत्र से गायब, रील व खेल में व्यस्त रहने के आरोप

कोंडागांव, 10 जनवरी 2026 | जिले के फरसगांव विकासखंड अंतर्गत ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (आरईओ) लकेश कुमार सेठिया की गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद कृषि विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। लगातार साप्ताहिक बैठकों में अनुपस्थित रहने, किसानों से संपर्क न रखने और शो-कॉज नोटिस का जवाब नहीं देने पर विभाग ने नवंबर व दिसंबर माह का वेतन रोक दिया है।

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कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार आरईओ लकेश सेठिया वर्तमान में भानपुरी में पदस्थ हैं तथा उन्हें आलोर का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। इसके बावजूद वे फरसगांव कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक बैठकों में नियमित रूप से शामिल नहीं हो रहे थे, जिससे उनके कार्यक्षेत्र से संबंधित सूचनाएं कार्यालय तक नहीं पहुंच पा रही थीं और किसानों के कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही थी।

 

इस संबंध में गुरुवार को कृषि विभाग फरसगांव के प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी तुलसी राम नेताम ने बताया कि आरईओ की लगातार अनुपस्थिति के कारण न केवल विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि किसान भी परेशान हैं। कई बार संबंधित क्षेत्र के किसान कार्यालय पहुंचकर आरईओ के बारे में जानकारी लेते रहे हैं, लेकिन अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र में उपलब्ध नहीं पाए गए।

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उन्होंने बताया कि साप्ताहिक बैठकों में शामिल नहीं होने के कारण संबंधित आरईओ को पहले ही शो-कॉज नोटिस जारी किया गया था, परंतु आज तक कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके अलावा गुरुवार को आयोजित साप्ताहिक बैठक में भी वे बिना अवकाश के अनुपस्थित रहे, जिस पर उन्हें पुनः नोटिस जारी किए जाने की कार्रवाई की जा रही है। उनके क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न विभागीय योजनाओं की प्रगति भी अत्यंत कम पाई गई है।

 

रील और खेल में व्यस्त, कार्यक्षेत्र से बाहर पाए गए आरईओ

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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरईओ लकेश सेठिया अपने शासकीय कर्तव्यों के बजाय सीजी मास्टर पर रील बनाने में अधिक सक्रिय नजर आते हैं। वहीं गुरुवार को, जब फरसगांव कार्यालय में साप्ताहिक बैठक आयोजित थी, उसी दौरान वे बड़ेराजपुर हाईस्कूल मैदान में आयोजित महिला खेल प्रतियोगिता में अपने साथियों के साथ खेल का आनंद लेते हुए देखे गए। जबकि बड़ेराजपुर क्षेत्र उनका कार्यक्षेत्र नहीं है।

 

बड़ा सवाल—किसानों और कार्यालय से दूर आरईओ आखिर करते क्या हैं?

 

जब कोई ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी न तो किसानों से मिल रहा हो, न कार्यालय आ रहा हो और न ही अपने कार्यक्षेत्र में उपलब्ध हो, तो यह सीधे तौर पर शासकीय दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही को दर्शाता है। बिना सूचना और बिना अवकाश के दूसरे ब्लॉक में पाया जाना गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।

 

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कृषि विभाग इस गंभीर लापरवाही को कितनी गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी पर आगे क्या कठोर कार्रवाई करता है।

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