झीरम की वह काली दोपहर : जब खरसिया ने खो दिया अपना जननायक
रायगढ़/ खरसिया सहित पूरे छत्तीसगढ़ में सोमवार को ‘झीरम श्रद्धांजलि दिवस’ भावुक वातावरण में मनाया गया। 25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में हुए भीषण नक्सली हमले को आज 13 वर्ष पूरे हो गए, लेकिन उस दर्दनाक घटना की टीस आज भी प्रदेशवासियों के दिलों में ताजा है। लोकतंत्र को लहूलुहान कर देने वाले इस नरसंहार में कांग्रेस पार्टी ने अपना शीर्ष नेतृत्व खो दिया था। हमले में वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और जवानों सहित 32 लोग शहीद हुए थे, जिनमें तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और उनके सुपुत्र दिनेश पटेल भी शामिल थे।
जन-जन के नेता थे नंदकुमार पटेल
राजनीतिक गलियारों में ‘पटेल जी’ के नाम से लोकप्रिय नंदकुमार पटेल केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि जनता की आवाज थे। सड़कों से लेकर सदन तक उन्होंने किसानों, मजदूरों, गरीबों और ग्रामीणों की समस्याओं को मजबूती से उठाया। उनकी सहजता, संघर्षशीलता और जनता से सीधा जुड़ाव उन्हें प्रदेश की राजनीति में विशिष्ट पहचान दिलाता था।
जब वे कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ का नेतृत्व कर रहे थे, तब पूरे प्रदेश में संगठन को नई ऊर्जा मिली थी। लेकिन झीरम घाटी की रक्तरंजित घटना ने एक ही पल में पूरे प्रदेश को शोक में डुबो दिया। उस हमले में उनके साथ मौजूद पुत्र दिनेश पटेल ने भी अंतिम क्षण तक पिता का साथ नहीं छोड़ा। दोनों की शहादत आज भी खरसिया और रायगढ़ अंचल के लोगों की आंखें नम कर देती है।
शांति बगिया में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
सोमवार सुबह से ही नंदेली स्थित ‘शांति बगिया’ समाधि स्थल पर लोगों का तांता लगा रहा। श्रद्धांजलि देने पहुंचे लोगों की आंखों में अपने प्रिय नेता की याद साफ झलक रही थी। क्षेत्रीय विधायक एवं स्व. नंदकुमार पटेल के पुत्र उमेश पटेल ने परिजनों, वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और बड़ी संख्या में उपस्थित नागरिकों के साथ समाधि स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

इस दौरान सुंदरकांड पाठ का आयोजन भी किया गया। चौपाइयों और मंत्रोच्चार के बीच पूरा वातावरण आध्यात्मिक और भावुक हो उठा। उपस्थित लोगों ने मौन रखकर शहीदों को नमन किया।
कांग्रेस कार्यालय में हुई श्रद्धांजलि सभा
मदनपुर स्थित कांग्रेस कार्यालय में भी विशेष श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। सभा में वक्ताओं ने नंदकुमार पटेल के संगठन कौशल, जमीनी राजनीति और जनसेवा के प्रति समर्पण को याद किया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने जीवनभर आम जनता की लड़ाई लड़ी और अंतिम समय तक जनता के बीच सक्रिय रहे।
सभा के दौरान विधायक उमेश पटेल अपने पिता और बड़े भाई की स्मृतियों को याद कर भावुक हो गए। उन्होंने कहा—
> “शहीद पिता नंदकुमार पटेल के अधूरे सपनों को साकार करना ही हमारा संकल्प है। उन्होंने अपना पूरा जीवन ग्राम, गरीब, मजदूर और किसानों की सेवा में समर्पित कर दिया था। आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
उन्होंने आगे कहा कि 25 मई 2013 का दिन केवल खरसिया ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ कांग्रेस के इतिहास का सबसे दुखद दिन था। उस दिन झीरम घाटी में नक्सली हमले में नंदकुमार पटेल, दिनेश पटेल, महेन्द्र कर्मा और विद्याचरण शुक्ल सहित अनेक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपने प्राण न्यौछावर किए थे।
आज भी जिंदा है उनकी विरासत
खरसिया अंचल में आज भी नंदकुमार पटेल का नाम सम्मान और आत्मीयता के साथ लिया जाता है। लोगों का कहना है कि उन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया और हमेशा अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का प्रयास किया।
13 वर्ष बाद भी झीरम घाटी की वह घटना केवल एक हमला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीतिक और सामाजिक चेतना पर लगा ऐसा घाव है, जिसे समय भी पूरी तरह भर नहीं पाया है। स्व. नंदकुमार पटेल और दिनेश पटेल की शहादत आज भी लोगों को सेवा, संघर्ष और जनसमर्पण की प्रेरणा देती है।
