Anp News Live Korba मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में आयोजित “सुशासन तिहार” अब केवल सरकारी योजनाओं के निराकरण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह शासन और जनता के बीच विश्वास और आत्मीयता का मजबूत माध्यम बनता जा रहा है। ऐसा ही भावुक और मानवीय दृश्य कोरबा ब्लॉक के सुदूर ग्राम केराकछार में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में देखने को मिला।
शिविर में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे थे, जिनमें विशेष पिछड़ी जनजाति “पहाड़ी कोरवा” समुदाय के परिवार भी शामिल थे। इसी दौरान जिले के कलेक्टर कुणाल दुदावत की नजर मंच के सामने बैठी 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला पर पड़ी। बिना किसी औपचारिकता के कलेक्टर स्वयं उनके पास पहुंचे और बड़े स्नेह से पूछा— “कैसी हो माताजी... राशनकार्ड से चावल मिल रहा है न? महतारी वंदन योजना के पैसे खाते में आ रहे हैं?”

कलेक्टर को अपने पास देखकर वृद्धा भावुक हो उठीं। उनके चेहरे पर संतोष भरी मुस्कान आ गई और उन्होंने सहजता से जवाब दिया— “हाँ साहब, सब मिल रहा है।” कलेक्टर ने उनसे गांव की समस्याओं, प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ और अन्य सुविधाओं के बारे में भी परिवार के सदस्य की तरह चर्चा की।
इस दौरान कलेक्टर ने भीड़ में बैठे एक अन्य बुजुर्ग से भी आत्मीय मुलाकात की, जो अपनी अनोखी लकड़ी की छड़ी के साथ शिविर में पहुंचे थे। उन्होंने ग्रामीणों से गांव की स्थिति जानी और पहाड़ी कोरवा समुदाय के लोगों को शासन की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
शिविर में कुछ महिलाओं ने महतारी वंदन योजना में नाम नहीं जुड़ पाने की समस्या भी बताई। इस पर कलेक्टर ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा कि पात्र और वंचित महिलाओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
केराकछार के ग्रामीणों के लिए यह शिविर सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि ऐसा अवसर बन गया जहां लोगों ने महसूस किया कि सरकार उनकी समस्याओं को सुनने और उनकी मुस्कान लौटाने के लिए खुद उनके बीच पहुंच रही है।
