कोण्डागांव, 15 मई 2026 | जिले में परिवहन विभाग के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। छत्तीसगढ़ परिवहन आयुक्त द्वारा नए वाहनों के पंजीयन और डिलीवरी को लेकर जारी सख्त निर्देशों के बावजूद जिले के कई टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर शोरूमों से बिना स्थायी नंबर प्लेट और अधूरी पंजीयन प्रक्रिया के नए वाहन सड़कों पर दौड़ते नजर आ रहे हैं। सवाल यह है कि जब शासन के स्पष्ट आदेश हैं, तो आखिर इन नियमों की अनदेखी किसके संरक्षण में हो रही है?
ईमानदार व्यापारियों पर दोहरी मार
इस अव्यवस्था का सबसे बड़ा नुकसान उन वाहन विक्रेताओं को उठाना पड़ रहा है, जो शासन के निर्देशों का पालन करते हुए पूरी प्रक्रिया के बाद ही वाहन डिलीवर कर रहे हैं। वहीं कुछ शोरूम संचालक नियमों को ताक पर रखकर तत्काल डिलीवरी देकर बाजार में अनुचित लाभ कमा रहे हैं। इससे व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा का संतुलन बिगड़ रहा है और ईमानदार व्यापारी आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं।
बड़ा सवाल: सड़क पर हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?
बिना वैध नंबर प्लेट और दस्तावेजों के सड़क पर उतर रहे ये वाहन न केवल गैरकानूनी हैं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा भी हैं। यदि ऐसे किसी वाहन से दुर्घटना होती है, तो न केवल बीमा क्लेम में परेशानी होगी, बल्कि कानूनी कार्रवाई में भी कई जटिलताएं सामने आएंगी। आखिर ऐसी स्थिति में जवाबदेही किसकी तय होगी—शोरूम संचालक, परिवहन विभाग या वाहन मालिक की?
DTO की चेतावनी, लेकिन असर कितना?
जिला परिवहन अधिकारी (DTO) कोण्डागांव ने सभी वाहन डीलरों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना स्थायी नंबर प्लेट के कोई भी वाहन ग्राहक को सुपुर्द न किया जाए। विभाग ने चेतावनी दी है कि नियम तोड़ने वाले डीलरों का ट्रेड सर्टिफिकेट निलंबित किया जा सकता है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आदेशों के बावजूद उल्लंघन जारी है, जिससे विभागीय निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि परिवहन विभाग केवल चेतावनी तक सीमित रहता है या नियम तोड़ने वाले शोरूम संचालकों पर वास्तव में सख्त कार्रवाई करता है। फिलहाल, कोण्डागांव की सड़कों पर बिना नंबर प्लेट दौड़ते वाहन व्यवस्था की कमजोरी की खुली तस्वीर पेश कर रहे हैं।
