कोरबा। करतला विकासखंड के ग्राम पंचायत कनकी में पंचायत सचिव लक्ष्मीनारायण राजपूत को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर के दौरान ग्रामीणों, पंचों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सचिव के खिलाफ गंभीर शिकायतें दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की है। मामला सामने आने के बाद पूरे पंचायत क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव अक्सर शराब के नशे में पंचायत कार्यालय और बैठकों में पहुंचते हैं। यही नहीं, पंचायत के प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही, मनमानी रवैया और ग्रामीणों से अभद्र व्यवहार करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पंचायत की व्यवस्थाएं पूरी तरह प्रभावित हो रही हैं, लेकिन लंबे समय से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
सुशासन तिहार के दौरान उठा मामला
जानकारी के अनुसार सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे थे। इसी दौरान ग्रामीणों ने सचिव के खिलाफ खुलकर शिकायतें कीं। आरोप लगाया गया कि शिविर के दिन भी सचिव कथित रूप से शराब के नशे में पहुंचे थे, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला।
ग्रामीणों ने कहा कि जब शासन लोगों की समस्याओं को सुनने और समाधान करने के लिए गांव-गांव शिविर आयोजित कर रहा है, ऐसे समय में जिम्मेदार अधिकारी का इस तरह का व्यवहार पंचायत की छवि खराब कर रहा है।
जनपद उपाध्यक्ष और कलेक्टर तक पहुंची शिकायत
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों और पंचों ने जनपद पंचायत उपाध्यक्ष मनोज झा सहित जिला प्रशासन को लिखित शिकायत भेजी। शिकायत में सचिव पर पंचायत कार्यों में अनियमितता, ग्राम सभा नहीं कराने, पंचायत का हिसाब-किताब स्पष्ट नहीं रखने और ग्रामीणों को जानकारी नहीं देने जैसे कई आरोप लगाए गए।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत से जुड़े कार्यों की जानकारी मांगने पर सचिव टालमटोल करते हैं और कई बार अभद्र व्यवहार भी करते हैं। कुछ ग्रामीणों ने विरोध करने पर धमकाने और विवाद करने तक के आरोप लगाए हैं।
प्रशासन ने बनाई जांच टीम
मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन द्वारा जांच टीम गठित की गई। जांच टीम में करारोपण अधिकारी उदय सिंह कंवर, सहायक विकास विस्तार अधिकारी आलोक कुमार गुप्ता और राजकुमार कंवर को शामिल किया गया। टीम ग्राम पंचायत कनकी पहुंची और ग्रामीणों, पंचों तथा शिकायतकर्ताओं से चर्चा कर बयान दर्ज किए।
जांच के दौरान कई ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएं
अधिकारियों के सामने रखीं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सचिव पिछले लगभग 10 वर्षों से एक ही पंचायत में पदस्थ हैं, जिसके कारण उन पर किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं रह गया है और मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है।
ग्राम सभा नहीं होने का आरोप
ग्रामीणों ने जांच टीम को बताया कि 14 अप्रैल को ग्राम सभा आयोजित नहीं की गई थी, जबकि इसकी जानकारी दी गई थी। पंचायत की बैठकें समय पर नहीं होने से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। साथ ही पंचायत के रिकॉर्ड और खर्च से जुड़ी जानकारी भी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि पंचायत में आने वाली विकास राशि के उपयोग में भी अनियमितता हो सकती है। हालांकि इस मामले में जांच टीम द्वारा दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
ग्रामीणों में नाराजगी, कार्रवाई की मांग तेज
गांव के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पंचायत व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
जांच टीम द्वारा ग्रामीणों के बयान और शिकायतों को दर्ज करने के बाद अब पूरे मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी। ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या पंचायत सचिव के खिलाफ जांच के बाद कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।
फिलहाल ग्राम पंचायत कनकी का यह मामला क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और ग्रामीण न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
