आज के दौर में बढ़ते प्रदूषण और लगातार कम होते जंगलों के बीच पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक सकारात्मक पहल लोगों के लिए प्रेरणा बन रही है। वकील रितेश मिश्रा पिछले करीब दस वर्षों से एक अनोखे तरीके से प्रकृति को बचाने का संदेश दे रहे हैं।
फलों की गुठलियों से हरियाली बढ़ाने का प्रयास
रितेश मिश्रा आम, जामुन, बेल, काली इमली जैसे फलों की गुठलियों को फेंकने के बजाय उन्हें धोकर सुखाते हैं। इसके बाद जब भी वे किसी जंगल, खाली जमीन या यात्रा के दौरान सुनसान इलाके से गुजरते हैं, तो उन बीजों को वहां फेंक देते हैं।
उनका मानना है कि यदि दस में से केवल एक बीज भी पौधा बन जाए, तो जीवनभर में हजारों पेड़ लगाए जा सकते हैं।
ब्राजील से मिली प्रेरणा
रितेश मिश्रा बताते हैं कि ब्राजील जैसे देशों में लोग इसी तरह बीजों को प्रकृति में फैलाते हैं, जिसके कारण वहां जंगलों का घनत्व काफी अधिक है। उनका कहना है कि भारत में भी लोग इस आदत को अपनाएं, तो आने वाले वर्षों में हरियाली बढ़ाने में बड़ी मदद मिल सकती है।
बाकी काम कुदरत खुद कर लेगी” — रितेश मिश्रा
वकील रितेश मिश्रा कहते हैं—
“हम अगर जिंदा हैं, वृक्षों की महत्ता समझते हैं और आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ पर्यावरण देना चाहते हैं, तो इतना छोटा प्रयास तो हर व्यक्ति कर सकता है। बाकी काम कुदरत खुद कर लेगी।”
पेड़ों का पर्यावरण में बड़ा योगदान
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार पेड़ केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि बारिश का संतुलन बनाए रखने, मिट्टी संरक्षण, भूजल स्तर सुधारने और प्रदूषण कम करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
लगातार कटते जंगलों के बीच यह पहल समाज को जागरूक करने का एक सकारात्मक माध्यम बन रही है।
लोगों से की खास अपील
रितेश मिश्रा ने लोगों से अपील की है कि वे फलों की गुठलियों को कचरे में फेंकने के बजाय सुरक्षित रखें और यात्रा के दौरान खाली जमीन या जंगल क्षेत्रों में डालें।
उनका कहना है कि छोटी-छोटी पहल मिलकर भविष्य में हरियाली की बड़ी क्रांति ला सकती है।
