गाजीपुर अगर कोई डीएम हो तो अनुपम शुक्ला जैसा: ताबड़तोड़ कार्रवाई से बदली गाजीपुर की तस्वीर

गाजीपुर। जब से अनुपम शुक्ला ने गाजीपुर जनपद की कमान संभाली है, तब से जिले के प्रशासनिक ढांचे में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। लंबे समय से सुस्त कार्यप्रणाली, लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे कई विभागों में अब जवाबदेही तय होने लगी है। जिलाधिकारी की सख्त कार्यशैली और लगातार मॉनिटरिंग ने अधिकारियों व कर्मचारियों में हड़कंप मचा दिया है, वहीं आम नागरिकों के बीच उम्मीद और विश्वास का माहौल बना है।

जनता का कहना है कि वर्षों बाद ऐसा जिलाधिकारी मिला है जो सिर्फ कार्यालयों में बैठकर समीक्षा नहीं करता बल्कि खुद मौके पर पहुंचकर व्यवस्था की हकीकत देखता है। चाहे स्वास्थ्य विभाग हो, शिक्षा विभाग, तहसील प्रशासन, ब्लॉक कार्यालय, नगर निकाय या राजस्व विभाग—हर जगह अब जवाबदेही तय हो रही है।

अचानक निरीक्षण से मचा हड़कंप

जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला लगातार सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, विद्यालयों और विकास कार्यों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। कई स्थानों पर कर्मचारियों की अनुपस्थिति, अधूरे कार्य और अनियमितताएं सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई गई। कई मामलों में जवाब तलब भी किया गया।

सूत्रों के अनुसार, जिलाधिकारी ने साफ संदेश दिया है कि जनता से जुड़ी योजनाओं में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यही वजह है कि अब अधिकांश विभागों में अधिकारी समय से कार्यालय पहुंचने लगे हैं और लंबित फाइलों का निस्तारण तेजी से किया जा रहा है।

भ्रष्टाचार पर सख्त रुख

गाजीपुर में लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कई विभागों में बिना सुविधा शुल्क के आम लोगों का कार्य नहीं होता था। लेकिन नवागत जिलाधिकारी के आने के बाद माहौल बदलता नजर आ रहा है। प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता बढ़ाने और शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

जनता के बीच चर्चा है कि जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गरीब, किसान, मजदूर और जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिलना चाहिए। यदि किसी कर्मचारी पर भ्रष्टाचार या उत्पीड़न का आरोप सिद्ध होता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।

फरियादियों की सुनवाई बनी प्राथमिकता

कलेक्ट्रेट में आने वाले फरियादियों का कहना है कि अब उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जा रहा है। पहले जहां शिकायतें महीनों तक लंबित रहती थीं, वहीं अब संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं।

जनसुनवाई व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा रही है। जिलाधिकारी स्वयं कई मामलों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं, जिससे लोगों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

विकास कार्यों की गुणवत्ता पर नजर

जनपद में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी जिलाधिकारी बेहद गंभीर दिखाई दे रहे हैं। सड़कों, नालों, विद्यालयों, पंचायत भवनों और अन्य सरकारी परियोजनाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है। खराब गुणवत्ता मिलने पर संबंधित कार्यदायी संस्थाओं पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

जिले में यह संदेश तेजी से फैल रहा है कि अब “कागजों पर विकास” नहीं बल्कि धरातल पर कार्य दिखना चाहिए। यही कारण है कि कई विभागों में काम की गति तेज हुई है।

जनता में बढ़ा भरोसा

गाजीपुर के आम नागरिकों, व्यापारियों, किसानों और युवाओं के बीच जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला की कार्यशैली को लेकर सकारात्मक चर्चा हो रही है। लोग खुलकर कह रहे हैं कि अगर प्रशासनिक अधिकारी ईमानदारी और सख्ती से काम करें तो व्यवस्था बदली जा सकती है।

सोशल मीडिया से लेकर चौराहों तक एक ही चर्चा है—“अगर कोई डीएम हो तो अनुपम शुक्ला जैसा।”

प्रशासनिक सख्ती का दिख रहा असर

जिलाधिकारी की सक्रियता का असर अब धीरे-धीरे पूरे प्रशासनिक तंत्र में दिखाई देने लगा है। अधिकारियों में जवाबदेही बढ़ी है और कई विभागों में कामकाज की गति सुधरी है। आम जनता को उम्मीद है कि यदि यही रफ्तार और सख्ती जारी रही तो गाजीपुर प्रशासन प्रदेश में एक नई मिसाल बन सकता है।

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