रायगढ़-केलो नदी का जलस्तर बढ़ने से शहर के एक व्यापारी की कार सहित नदी में डूबने से हुई मौत के दो साल पुराने बहुचर्चित मामले में उपभोक्ता फोरम ने अहम फैसला सुनाया है। बीमा अवधि के दौरान वाहन क्षतिग्रस्त होने के बावजूद बीमा क्लेम का भुगतान करने से इनकार करने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग रायगढ़ ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए कुल 15 लाख 20 हजार रुपए का भुगतान करने का आदेश पारित किया है।
आयोग द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार बीमा कंपनी को क्लेम राशि के रूप में 15 लाख रुपए, मानसिक क्षति के लिए 15 हजार रुपए तथा वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपए 45 दिवस के भीतर आवेदिका को अदा करना होगा। निर्धारित समयावधि में भुगतान नहीं किए जाने की स्थिति में उक्त राशि पर भुगतान की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देय होगा।
प्रकरण के अनुसार आवेदिका शारदा देवी अग्रवाल, निवासी शारदा निकेतन, मिनी मुड़ा एफसीआई गोदाम, रायगढ़ की टोयोटा कार ग्लैंजा क्रमांक सीजी-13-एडब्ल्यू-2527 का बीमा टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, बिलासपुर द्वारा कराया गया था। यह बीमा “बंडल्ड ऑटो सिक्योर-प्राइवेट कार पॉलिसी” के तहत 31 जुलाई 2023 से 30 जुलाई 2026 तक प्रभावी था, जिसमें स्वयं के नुकसान (ओन डैमेज) के लिए एक वर्ष तथा थर्ड पार्टी के लिए तीन वर्ष का प्रावधान था।
बीमा पॉलिसी के अनुसार वाहन स्वामी-चालक के लिए 15 लाख रुपए का बीमा कवर निर्धारित था। आवेदिका नामिनी होने के नाते बीमा क्लेम प्राप्त करने की अधिकारी थी।
हादसे में हुई थी वाहन स्वामी की मौत
3 अक्टूबर की शाम करीब 7:30 बजे बीमित वाहन स्वामी नटवर लाल चक्रधर मार्ग से अपने गंतव्य की ओर जा रहे थे। इसी दौरान अचानक केलो नदी का जलस्तर बढ़ जाने के कारण वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया और कार सहित नदी में डूबने से उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद आवेदिका शारदा देवी अग्रवाल ने 1 दिसंबर 2023 को टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी के समक्ष बीमा क्लेम प्रस्तुत किया। आरोप है कि बीमा कंपनी ने क्लेम भुगतान से बचने के उद्देश्य से सर्वेयर के माध्यम से यह प्रतिवेदन तैयार कराया कि दुर्घटना बीमित व्यक्ति की असावधानी के कारण हुई है।
क्लेम अस्वीकृति और कानूनी नोटिस
बीमा कंपनी ने 15 अप्रैल 2024 को यह कहते हुए बीमा क्लेम अस्वीकार कर दिया कि सर्वेयर की रिपोर्ट के अनुसार दुर्घटना चालक की लापरवाही से हुई है। इसके बाद आवेदिका ने 23 अप्रैल 2024 को अपने अधिवक्ता के माध्यम से बीमा कंपनी को पंजीकृत डाक द्वारा कानूनी नोटिस भेजा।
नोटिस प्राप्त होने के बावजूद बीमा कंपनी द्वारा न तो कोई जवाब दिया गया और न ही क्लेम राशि का भुगतान किया गया, जिसे उपभोक्ता फोरम ने सेवा में कमी माना।
उपभोक्ता फोरम का निर्णय
मामले की सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग रायगढ़ के अध्यक्ष छमेश्वरलाल तथा सदस्यद्वय राजेन्द्र पाण्डेय एवं राजश्री अग्रवाल ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को सेवा में कमी का दोषी ठहराया। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा अवधि के दौरान हुई दुर्घटना और वाहन क्षति बीमा पॉलिसी के अंतर्गत आती है, ऐसे में क्लेम अस्वीकार करना अनुचित है।
आयोग के इस फैसले को बीमा उपभोक्ताओं के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, जिससे बीमा कंपनियों द्वारा तकनीकी आधार पर क्लेम निरस्त करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा।
