सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, अब सजा तय—आईजी ने पुलिस को दिए हाईटेक जांच के मंत्र

Anp News Live, Bilaspur हत्या जैसे गंभीर अपराधों में दोषियों को सख्त सजा दिलाने के उद्देश्य से बिलासपुर रेंज पुलिस ने अब ‘स्मार्ट विवेचना’ की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग के मार्गदर्शन में रेंज स्तर पर एक विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें एएसपी से लेकर उपनिरीक्षक स्तर तक के अधिकारी शामिल हुए।

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य हत्या के मामलों की जांच को वैज्ञानिक, तकनीकी और त्रुटिहीन बनाकर न्यायालय में दोषसिद्धि (Conviction) की दर को 100 प्रतिशत तक पहुंचाना है। आईजी गर्ग ने स्पष्ट किया कि अब पुलिस का लक्ष्य केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ठोस साक्ष्यों के आधार पर उसे सजा दिलाना प्राथमिकता होगी।

 ‘ई-साक्ष्य’ से मजबूत होगी केस डायरी

नई कार्यप्रणाली के तहत अब सभी जब्ती कार्यवाही ‘ई-साक्ष्य’ ऐप के माध्यम से वीडियोग्राफी के साथ की जाएगी। इससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और गवाहों के मुकरने की स्थिति में भी डिजिटल साक्ष्य मजबूत भूमिका निभाएंगे।

 क्राइम सीन का होगा वैज्ञानिक प्रबंधन

घटनास्थल पर ‘गोल्डन ऑवर’ को ध्यान में रखते हुए तत्काल क्षेत्र को सील किया जाएगा। फोरेंसिक टीम, डॉग स्क्वॉड और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट की मौजूदगी में ही साक्ष्य संकलन किया जाएगा। बिना दस्ताने किसी भी साक्ष्य को छूने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

 124 बिंदुओं की चेकलिस्ट लागू

विवेचना में किसी भी प्रकार की चूक न हो, इसके लिए 124 बिंदुओं की विस्तृत चेकलिस्ट तैयार की गई है। एफआईआर से लेकर चार्जशीट तक हर प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण अनिवार्य होगा, जिससे अदालत में केस मजबूत बने।

 डिजिटल और साइबर फॉरेंसिक पर फोकस

अब जांच में आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट जैसे गूगल टेकआउट, इंटरनेट हिस्ट्री, व्हाट्सएप लॉग्स आदि का गहन विश्लेषण किया जाएगा। साथ ही घटनास्थल के 100 किलोमीटर के दायरे में लगे सीसीटीवी कैमरों की मैपिंग कर साक्ष्य जुटाए जाएंगे।

 DNA और बायोलॉजिकल साक्ष्य होंगे अहम

मृतक के नाखून, बाल और कपड़ों से डीएनए साक्ष्य जुटाकर आरोपी को घटनास्थल से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा, जिससे वैज्ञानिक आधार पर अपराध सिद्ध किया जा सके।

 साक्ष्यों की ‘चेन ऑफ कस्टडी’ पर सख्ती

साक्ष्य के संग्रहण से लेकर एफएसएल तक भेजने की पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखा जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना खत्म हो सके।

 हर सप्ताह होंगे प्रशिक्षण सत्र

आईजी गर्ग ने बताया कि अप्रैल 2026 के बाद सभी हत्या प्रकरणों में यही नई तकनीकी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। साथ ही पुलिस अधिकारियों को लगातार अपडेट रखने के लिए हर सप्ताह विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे।

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