रिपोर्ट- अंकित दुबे
Anp News Live गाजीपुर। सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। गाजीपुर जनपद में कथित तौर पर फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाकर गरीब परिवारों से मोटी रकम वसूलने वाले गिरोह के सक्रिय होने का आरोप लगा है। पीड़ित परिवार ने पुलिस पर कार्रवाई न करने और आरोपियों को संरक्षण देने का भी गंभीर आरोप लगाया है।
मामला बहरियाबाद थाना क्षेत्र के नादेपुर गांव का है, जहां निवासी सुनीता देवी ने क्षेत्राधिकारी सैदपुर को दिए गए लिखित प्रार्थना पत्र में बताया कि उनकी पुत्री अंजली चौहान के गाल में ट्यूमर था, जिसका इलाज लखनऊ पीजीआई में चल रहा है। इसी दौरान उनकी मुलाकात स्थानीय क्षेत्र स्थित आरजी प्रिंटिंग प्रेस संचालक रोहित गुप्ता से हुई। आरोप है कि उसने 20 हजार रुपये लेकर 5 लाख रुपये वाला आयुष्मान कार्ड बनवाने का भरोसा दिया।
पीड़िता के अनुसार, आर्थिक तंगी के बीच बेटी के इलाज की उम्मीद में उन्होंने नगद रुपये दे दिए, लेकिन बाद में उन्हें फर्जी आयुष्मान कार्ड थमा दिया गया। आरोप है कि यह पूरा खेल वर्ष 2021 में किया गया। परिवार का कहना है कि उनके राशन कार्ड में केवल पांच सदस्य दर्ज हैं, बावजूद इसके जालसाजों ने गलत तरीके से कार्ड तैयार कर दिया।
पीड़िता ने बताया कि जब वह बेटी का इलाज कराने अस्पताल पहुंचीं तो डॉक्टरों ने जांच में कार्ड को फर्जी बताया। कार्ड में पहले से ही आजमगढ़ निवासी “अंजली कुमारी” का विवरण दर्ज मिला। यह जानकारी मिलते ही परिवार के होश उड़ गए।
शिकायत के बाद जब परिवार ने कथित CSC संचालक रितिक गुप्ता से संपर्क किया तो उसने कथित तौर पर गलती स्वीकार करते हुए कहा कि पहले कार्ड को सीएमओ कार्यालय में सरेंडर कर दिया जाए, उसके बाद ली गई रकम वापस कर दी जाएगी।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि मामले की शिकायत स्थानीय थाने में किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सोमवार को महिला ने क्षेत्राधिकारी सैदपुर बालकृष्ण को लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई। बताया जा रहा है कि सीओ सैदपुर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। 
अब सवाल यह उठ रहा है कि गरीबों के इलाज के लिए शुरू की गई आयुष्मान योजना में सेंध लगाने वाले कथित गिरोह पर पुलिस कार्रवाई करेगी या मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा। वहीं नवागत जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला के प्रशासनिक तंत्र पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर ऐसे मामलों में दोषियों पर कब तक शिकंजा कसा जाएगा।
