कोंडागांव, 13 अक्टूबर 2025: कोंडागांव ज़िले के विकासखंड माकड़ी अंतर्गत ग्राम पंचायत मगेदा के युवाओं ने एक अनुकरणीय पहल करते हुए समाज सेवा की अनोखी मिसाल पेश की है। वर्षों से जर्जर पड़ी गांव की सड़क की सुध न लेते देख युवाओं ने प्रशासन का इंतजार करने की बजाय खुद आगे बढ़कर मोर्चा संभाला और गांव वालों से चंदा इकट्ठा कर तथा श्रमदान के माध्यम से सड़क की मरम्मत कर डाली।
20 साल पुरानी सड़क, हाल बेहाल

मगेदा से गम्हरी तक की लगभग 5 किलोमीटर लंबी सड़क बीते कई वर्षों से बदहाल थी। जगह-जगह गहरे गड्ढे हो गए थे और एक पुलिया भी क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। खासकर बारिश के मौसम में कीचड़ और गड्ढों से होकर निकलना ग्रामीणों के लिए जान जोखिम में डालने जैसा हो गया था।
सरपंच प्रतिनिधि बसमन नेताम ने बताया कि इस सड़क का निर्माण लगभग 20 साल पहले हुआ था और कई बार संबंधित विभागों को इसकी मरम्मत के लिए अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
युवाओं ने खुद उठाया जिम्मा

गांव के युवाओं ने जब देखा कि प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही है, तो उन्होंने खुद ही जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया। घर-घर जाकर चंदा एकत्र किया गया और ग्रामीणों के सहयोग से श्रमदान कर सड़क को इस काबिल बनाया कि अब आमजन आराम से आवाजाही कर सकें।
“युवाओं ने दिखाई राह” – ग्रामीणों की प्रतिक्रिया

ग्रामीण देवेन्द्र नाग ने बताया, “हम कई सालों से पक्की सड़क की मांग कर रहे थे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब युवाओं ने अपनी मेहनत और संसाधनों से सड़क को दुरुस्त कर दिया। अब बरसात में आना-जाना सुगम हो गया है।”
वहीं रमेश नेताम ने कहा, “बड़े-बड़े गड्ढों की वजह से बच्चों और बुजुर्गों को खासी दिक्कतें होती थीं। युवाओं की इस पहल से पूरी पंचायत को राहत मिली है। शासन को अब जल्द से जल्द इस सड़क का डामरीकरण करना चाहिए।”
अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणा

मगेदा के इस सामूहिक प्रयास की चारों ओर सराहना हो रही है। आस-पास की पंचायतें भी इसे एक उदाहरण मान रही हैं कि जब एकजुट होकर समाज के युवा आगे आते हैं, तो बड़े बदलाव संभव हैं।
कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद
इस नेक कार्य में सरपंच राजन नेताम, सरपंच प्रतिनिधि बसमन नेताम, देवेन्द्र नाग, मनेश नेताम, रमेश नेताम, विरदेव नेताम, हरिलाल मरकाम, सीलिंग नेताम, चमरू नेताम, सोनाऊ नेताम, दिलीप मरकाम, बुधमन नेताम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।
संपादकीय टिप्पणी:
“मगेदा गांव के युवाओं की यह पहल न केवल समस्या के समाधान की मिसाल है, बल्कि यह प्रशासनिक उदासीनता के बीच आम नागरिकों की जिम्मेदारी और जागरूकता का भी परिचायक है। शासन-प्रशासन को चाहिए कि ऐसे प्रयासों को सहयोग दें और स्थायी समाधान के लिए जल्द कार्रवाई करें।”
