कोंडागांव, 10 दिसंबर 2025 | जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) कोंडागांव ने स्कूली बच्चों द्वारा पढ़ाई छोड़कर सड़क पर प्रदर्शन करने के मामले में जिला प्रशासन की कार्यशैली और चुप्पी पर कड़ी नाराजगी जताई है। प्रशासन द्वारा समय सीमा के भीतर जवाब न देने पर माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सख्त रुख अपनाते हुए कलेक्टर और एसडीएम को पुनः 'स्मरण पत्र' जारी किया है।
क्या है पूरा मामला?
बीती 28 नवंबर 2025 को स्थानीय समाचार पत्रों में स्कूली बच्चों के प्रदर्शन को लेकर खबर प्रकाशित हुई थी। इस खबर का स्वतः संज्ञान लेते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष (जिला एवं सत्र न्यायाधीश) ने इसे गंभीरता से लिया था। प्राधिकरण ने जिला प्रशासन को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर पूरी जानकारी मांगी थी, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

न्यायालय ने उठाए तीखे सवाल
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए न्यायालय ने पूछा है कि आखिर मासूम स्कूली बच्चों को पढ़ाई-लिखाई छोड़कर सड़कों पर उतरने की आवश्यकता अचानक क्यों पड़ी?
प्राधिकरण ने प्रशासन से निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है:
* पूर्व सूचना का अभाव: आंदोलन के संबंध में प्रशासन को पहले से अवगत क्यों नहीं कराया गया?
* काउंसलिंग की कमी: जब छात्र-छात्राएं स्कूल के समय बाहर निकले, तो उन्हें समझाने या रोकने का प्रयास क्यों नहीं किया गया?
* कानून व्यवस्था: बच्चों के सड़क पर उतरने से शहर में कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित हुई, इसका जिम्मेदार कौन है?
* बोर्ड परीक्षाएं: विधिक सेवा प्राधिकरण ने चिंता जताई है कि हायर सेकेंडरी और हाई स्कूल की बोर्ड परीक्षाएं सिर पर हैं। ऐसे समय में बच्चों का पढ़ाई छोड़कर आंदोलन करना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

कलेक्टर-एसडीएम को निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देशित किया गया है कि वे कलेक्टर कोंडागांव तथा एसडीएम को पुनः स्मरण पत्र (Reminder Letter) जारी कर समुचित जानकारी तलब करें।
उद्देश्य:
न्यायालय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूली बच्चों के हितों और जिले की कानून व्यवस्था का उल्लंघन न हो। साथ ही, बच्चों को शिक्षा से वंचित न होना पड़े और उनकी परेशानियों का उचित समाधान निकाला जा सके।
