बिलासपुर रेंज में मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। 21 अप्रैल 2026 को आयोजित इस कार्यशाला में NDPS एक्ट के तहत विवेचना की गुणवत्ता सुधार पर विशेष जोर दिया गया।
यह कार्यशाला पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज राम गोपाल गर्ग के निर्देशन में आयोजित की गई, जिसमें रेंज के विभिन्न जिलों से करीब 100 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी ऑनलाइन जुड़कर प्रशिक्षण प्राप्त किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि NDPS मामलों में अक्सर छोटी-छोटी प्रक्रियात्मक त्रुटियों के कारण आरोपी न्यायालय से छूट जाते हैं। ऐसे में विवेचना को तकनीकी रूप से मजबूत और त्रुटिरहित बनाना बेहद आवश्यक है।
कार्यशाला में सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक अभियोजन (बिलासपुर संभाग) माखनलाल पाण्डेय ने NDPS एक्ट से जुड़ी बारीकियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि तलाशी और जब्ती के दौरान धारा 42, 50 और 57 का सख्ती से पालन करना जरूरी है, क्योंकि छोटी सी गलती भी पूरे केस को कमजोर कर सकती है।
उन्होंने नमूनाकरण और जब्त मादक पदार्थों के निपटान के नए नियमों की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2022 के प्रावधानों के अनुसार ही पूरी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विवेचना केवल जब्ती तक सीमित न रहे, बल्कि मादक पदार्थ के स्रोत से लेकर उसके गंतव्य तक पूरी कड़ी को जोड़ना जरूरी है, ताकि ड्रग नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
कार्यशाला में दस्तावेजीकरण, साक्ष्य संकलन, स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति और समय की सटीकता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिलाया गया। आधुनिक तकनीक और डिजिटल साक्ष्यों के उपयोग को भी विवेचना का अहम हिस्सा बताया गया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें पुलिस अधिकारियों ने अपनी व्यावहारिक समस्याएं रखीं, जिनका समाधान विशेषज्ञ द्वारा किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य NDPS मामलों में होने वाली तकनीकी और प्रक्रियागत कमियों को दूर करना है, ताकि आरोपी कानून की खामियों का फायदा उठाकर बच न सकें। पुलिस विभाग का मानना है कि इस प्रशिक्षण से आने वाले समय में NDPS मामलों की विवेचना और अधिक सशक्त और प्रभावी होगी।
कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षक माखनलाल पाण्डेय को पुलिस महानिरीक्षक द्वारा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन उप पुलिस अधीक्षक विवेक शर्मा द्वारा किया गया।
इस पहल को नशे के खिलाफ पुलिस की सख्त रणनीति और बेहतर न्यायिक परिणाम सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
