जयसिंगटोला में “मस्ती की पाठशाला” बनी बच्चों के लिए सीख और संस्कृति का केंद्र, मोबाइल की लत से हो रहे दूर

 

छुरिया। आधुनिक दौर में जहां बच्चे मोबाइल और डिजिटल दुनिया में अधिक समय बिताने लगे हैं, वहीं ग्राम जयसिंगटोला में बच्चों को उनकी संस्कृति, परंपरा और खेलों से जोड़ने की एक सराहनीय पहल देखने को मिल रही है। जनपद पंचायत छुरिया के आजीविका मिशन सभापति हेमिन विष्णु साहू द्वारा 22 मई से 30 मई तक “मस्ती की पाठशाला” का आयोजन किया गया है, जिसमें बच्चे बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। इस आयोजन में न केवल बच्चे बल्कि ग्रामीणजन भी उत्साहपूर्वक अपनी सहभागिता निभा रहे हैं।

“मस्ती की पाठशाला” का उद्देश्य बच्चों को छत्तीसगढ़ की विलुप्त होती पारंपरिक खेल, लोककला, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना है। पाठशाला में बच्चों को पारंपरिक खेलों का अभ्यास कराया जा रहा है, साथ ही लोकगीत, लोकनृत्य, सामान्य ज्ञान एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर भी दिया जा रहा है। इससे बच्चों में नई ऊर्जा और उत्साह देखने को मिल रहा है।

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कार्यक्रम में बच्चों को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, पारंपरिक रीति-रिवाज और सामूहिक सहभागिता के महत्व के बारे में भी बताया जा रहा है। बच्चों को मनोरंजन के साथ शिक्षा देने की इस अनोखी पहल को ग्रामीणों का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चे गांव की संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़ रहे हैं, जो वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

हेमिन विष्णु साहू ने बताया कि आज की पीढ़ी मोबाइल फोन की ओर अधिक आकर्षित हो रही है, जिसके कारण बच्चों का बचपन और सामाजिक मेलजोल प्रभावित हो रहा है। इसी सोच के साथ “मस्ती की पाठशाला” की शुरुआत की गई, ताकि बच्चे खेल-कूद, कला और संस्कृति के माध्यम से सीख सकें और मोबाइल की लत से दूर रहकर रचनात्मक गतिविधियों में भाग लें।

ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन गांव के बच्चों के भविष्य के लिए लाभदायक साबित होंगे। गांव में आयोजित “मस्ती की पाठशाला” को लेकर बच्चों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है और वे प्रतिदिन बढ़-चढ़कर इसमें भाग ले रहे हैं।

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