मिनीमाता महतारी जतन योजना में कथित फर्जीवाड़ा, एक माह बाद भी कार्रवाई नहीं

(कोरबा)बहुचर्चित 'मिनीमाता महतारी जतन योजना' में सामने आए कथित फर्जीवाड़े को लेकर कोरबा में एक बार फिर विवाद गहरा गया है। छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ ने आरोप लगाया है कि श्रम विभाग की जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बावजूद एक माह बीत जाने पर भी दोषियों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए संगठन ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।


संघ के अनुसार, 25 जून को सहायक श्रमायुक्त को ज्ञापन सौंपकर सात दिनों के भीतर कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी विभाग की ओर से न तो कोई ठोस कदम उठाया गया और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने मामले पर स्पष्ट जवाब दिया। संगठन का आरोप है कि जवाब मांगने पर संबंधित अधिकारी फोन तक नहीं उठा रहे हैं।

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संघ का दावा है कि श्रम विभाग की आधिकारिक जांच रिपोर्ट में जन्म प्रमाण-पत्र एवं जच्चा-बच्चा कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की कथित कूट-रचना कर शासन की कल्याणकारी राशि का अवैध लाभ लेने के 50 प्रकरण चिन्हित किए गए थे। आरोप है कि विभाग ने केवल 21 मामलों में आंशिक वसूली कर कार्रवाई सीमित कर दी, जबकि शेष 29 मामलों में अब तक न तो राशि की वसूली की गई और न ही संबंधित लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई हुई।


छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ ने मांग की है कि कथित फर्जीवाड़े में संलिप्त तत्कालीन श्रम निरीक्षकों, उप-निरीक्षकों एवं कल्याण निरीक्षकों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त पूरी राशि की शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित की जाए तथा अपात्र लाभार्थियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए।


संघ के जिलाध्यक्ष निलेश कुमार साहू ने कहा कि लगातार एक माह तक इंतजार करने और प्रशासनिक उदासीनता के बाद संगठन अब आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए विवश है। उन्होंने चेतावनी दी कि शीघ्र ही कोरबा स्थित श्रम कार्यालय का घेराव कर व्यापक जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान यदि कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है तो इसकी जिम्मेदारी श्रम विभाग और जिला प्रशासन की होगी।


मामले को लेकर मजदूरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस विवाद पर क्या कदम उठाता है और आरोपों की जांच व कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है।

 

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