राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ में शराब नीति को लेकर लगातार विरोध करने वाली कांग्रेस अब खुद सवालों के घेरे में नजर आ रही है। खुज्जी गांव में शराब दुकान खुलने के साथ ही पार्टी की कथनी और करनी पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
सूत्रों के मुताबिक, जिस जमीन पर यह शराब दुकान संचालित हो रही है, वह कांग्रेस से जुड़े एक जनपद सदस्य की बताई जा रही है। साथ ही उनका संबंध खुज्जी विधानसभा के वर्तमान विधायक से भी जोड़ा जा रहा है। दुकान शुरू होते ही यह मामला राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ गांव में चर्चा का विषय बन गया है।
इधर, इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों और खासकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। किसानों का आरोप है कि शराब दुकान से निकलने वाला कचरा—डिस्पोजल, प्लास्टिक और पानी पाउच—उनके खेतों तक पहुंच रहा है, जिससे जमीन की उर्वरता पर असर पड़ने का खतरा है। इसे वे अपनी आजीविका पर सीधा प्रहार मान रहे हैं।
बताया जा रहा है कि खुज्जी विधायक पहले अवैध शराब और त्योहारों के दौरान खुलने वाली भट्टियों का खुलकर विरोध करते रहे हैं और खुद को किसान हितैषी नेता के रूप में पेश करते आए हैं। लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि उसी शराब कारोबार के लिए अपने ही परिवार से जुड़ी जमीन उपलब्ध कराकर उन्होंने अपनी ही छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस मुद्दे को लेकर स्थानीय लोगों और राजनीतिक हलकों में कांग्रेस पर “दोहरे मापदंड” अपनाने के आरोप तेज हो गए हैं। लोगों का कहना है कि जनता के सामने विरोध और अंदरखाने फायदा लेने की राजनीति अब खुलकर सामने आ रही है।
सूत्रों का दावा है कि एक जनप्रतिनिधि केवल शराब दुकान से मिलने वाले किराए के लिए पूरी पार्टी की छवि को दांव पर लगाने से भी नहीं हिचक रहा है।
अब देखना यह होगा कि कांग्रेस इस मामले में क्या सफाई देती है और कोई ठोस कार्रवाई करती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता है।
