छुरिया। गैंदाटोला–नुन्हाटोला मार्ग स्थित शासकीय शराब दुकान को लेकर कई दिनों से चल रहा विरोध आंदोलन आखिरकार रंग लाया। महिलाओं और ग्रामीणों के लगातार संघर्ष, आक्रोश और सड़क किनारे चले धरने के आगे प्रशासन को झुकना पड़ा। सहायक आबकारी आयुक्त के धरनास्थल पहुंचने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था होने तक शराब दुकान बंद रखने का निर्णय सामने आया, जिसके बाद आंदोलनकारी महिलाओं और ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई।

गौरतलब है कि नुन्हाटोला सहित आसपास के ग्रामीण शराब दुकान को अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग को लेकर लगातार आंदोलनरत थे। ग्रामीणों का कहना था कि जिस मार्ग से रोजाना स्कूली बच्चे, छात्राएं और महिलाएं गुजरती हैं, वहां शराब दुकान संचालित होने से सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा था और असामाजिक गतिविधियों की आशंका बढ़ रही थी। महिलाओं ने खुलकर अपनी पीड़ा रखते हुए कहा था कि शराब दुकान से गांव का माहौल बिगड़ रहा है और बहन-बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।
भीषण गर्मी और तपती धूप के बावजूद महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सड़क किनारे पंडाल लगाकर दिन-रात डटे रहे। छोटे बच्चों के साथ महिलाएं धरने पर बैठीं और एक ही आवाज बुलंद होती रही — “पहले शराब दुकान हटाओ, फिर हटेगा पंडाल।” कई रातें धरना स्थल पर गुजारने के बाद आखिरकार आंदोलन असर दिखाता नजर आया।
मुख्यमंत्री निवेदन यात्रा से पहले प्रशासन का बड़ा फैसला
आंदोलनकारी मुख्यमंत्री निवेदन यात्रा निकालने की तैयारी में थे। रायपुर पहुंचकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने और शराब दुकान हटाने की मांग सीधे सरकार तक पहुंचाने की योजना थी। लेकिन इससे पहले ही प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए बड़ा कदम उठाया। बताया जा रहा है कि सहायक आबकारी आयुक्त स्वयं धरनास्थल पहुंचे और वैकल्पिक व्यवस्था होने तक दुकान बंद रखने का निर्णय सामने आया।
मिला सामाजिक और राजनीतिक समर्थन
इस आंदोलन को पूर्व विधायक छन्नी साहू, प्रदेश किसान संघ सहित कई सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार दबाव, महिलाओं के आक्रोश और जनसमर्थन के चलते प्रशासन को आखिरकार निर्णय लेना पड़ा।
आंदोलनकारियों ने इसे “जनता के संघर्ष की जीत” बताते हुए कहा कि यह केवल शराब दुकान हटाने की लड़ाई नहीं थी, बल्कि गांव की सुरक्षा, सामाजिक माहौल और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को बचाने का संघर्ष था। हालांकि ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे प्रशासन के लिखित आदेश और आगे की कार्रवाई पर नजर बनाए रखेंगे, ताकि भविष्य में फिर से विवाद की स्थिति न बने।

धरना खत्म, अब गांव में एक ही चर्चा — “संघर्ष में कौन था साथ?”
गैंदाटोला आंदोलन के बाद पूर्व विधायक छन्नी साहू की सक्रियता बनी चर्चा का विषय

गैंदाटोला शराब दुकान आंदोलन अब केवल प्रशासनिक फैसले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने क्षेत्र की राजनीति में भी नई चर्चा छेड़ दी है। शराब दुकान फिलहाल बंद होने के फैसले के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि संघर्ष के समय जनता के साथ कौन खड़ा नजर आया।
ग्रामीणों का कहना है कि आंदोलन के दौरान कई जनप्रतिनिधियों और संगठनों से समर्थन मांगा गया था। इस बीच पूर्व विधायक छन्नी साहू लगातार धरना स्थल पर सक्रिय नजर आईं। भीषण गर्मी में सड़क किनारे लगे पंडाल में महिलाओं और ग्रामीणों के बीच बैठना, उनकी समस्याएं सुनना और प्रशासनिक स्तर पर मुद्दा उठाना — इन सबने उन्हें आंदोलन का प्रमुख राजनीतिक चेहरा बना दिया।
ग्रामीणों की राय
कई ग्रामीणों ने खुलकर कहा — “नेता वही होता है जो चुनाव के बाद भी जनता के संघर्ष और मुश्किल समय में साथ खड़ा रहे।” महिलाओं और युवाओं के बीच भी यह चर्चा बनी रही कि संघर्ष के दौरान कौन केवल आश्वासन देता रहा और कौन वास्तव में धरना स्थल तक पहुंचा।
