चकुन्डा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा पंडाल में उमड़े ग्रामीण

चकुन्डा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा पंडाल में उमड़े ग्रामीण

चकुंडा में रामजानकी मंदिर मे चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक सतनारायण वैष्णव ने जड़ भरत के वंश का वर्णन, अजामिल नारदजी को दक्ष श्राप, अजामिल की उपासना, ब्रह्माजी द्वारा हिरण्यकश्यप की तपस्या के बाद वरदान, प्रहलाद जन्म, राजा बलि और वामन अवतार, वत्रासुर की उत्पत्ति, भगवान विष्णु का नरसिंह अवतार के साथ ही हिरण्यकश्यप के वध की कथा विस्तार पूर्वक श्रद्धालुओं को सुनाई।उन्होंने बताया कि ब्रह्माजी की हिरण्यकश्यप कठोर तपस्या करता है। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी वरदान देते है कि उसे ना कोई घर में मार सके ना बाहर, ना अस्त्र से और ना शस्त्र से, ना दिन में मरे ना रात में, ना मनुष्य से मरे ना पशु से, ना आकाश में ना पृथ्वी में। इस वरदान के बाद हिरण्यकश्यप ने प्रभु भक्तों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया, लेकिन भक्त प्रहलाद के जन्म के बाद हिरण्यकश्यप उसकी भक्ति से भयभीत हो जाता है, उसे मृत्यु लोक पहुंचाने के लिए प्रयास भक्त प्रहलाद को अपने पिता हिरण्यकश्यप ने केवल अपना ही नाम लेने को कहा और भगवान के नाम का विरोध किया, परंतु प्रहलाद ने भगवान का नाम नहीं छोड़ा। इससे क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने के अनेक प्रय| किए । उसे पहाड़ों से गिराया। सांपों से डसवाया। हाथी से कुचलवाया और अंत में होलिका के संग जलाया, परन्तु जिसका भगवान रक्षक होता है उसका कोई कुछ भी बिगाड़ा नहीं सकता। इसके बाद भगवान विष्णु भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नरसिंह अवतार लेते है। और हिरण्यकश्यप का वध कर देते हैं।Uploaded Image कथा के दौरान वैष्णव ने आकर्षक भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को आनंदित कर दिया।

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