विचाराधीन बंदियों के मामलों की प्रभावी समीक्षा हेतु वर्ष 2026 के अंतर्गत द्वितीय अण्डर ट्रायल रिव्यू कमेटी की बैठक सम्पन्न

कोंडागांव, 15 अप्रैल 2026 | प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोण्डागांव खिलावन राम रीगरी के अध्यक्षता एवं उनकी उपस्थिति में वर्ष 2026 का द्वितीय अण्डर ट्रायल रिव्यू कमेटी की बैठक आज कोण्डागांव एवं नारायणपुर जिले के अधिकारियों की उपस्थिति में न्यास सदन भवन में हुई सम्पन्न।

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बैठक में कलेक्टर कोण्डागांव नुपूर राशि पन्ना, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोण्डागांव गायत्री साय, डिप्टी कलेक्टर नारायणपुर दुशयंत कृतिमान कौशले अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कोण्डागांव कपिल चंन्द्रा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नारायणपुर एश्वर्य चन्द्राकर उप-जेल अधीक्षक केन्द्रीय जेल जगदलपुर मधु सिंह, सहायक उप-जेल अधीक्षक नारायणपुर संजय नायक, लीगल एड डिफेंस कौंसिल कोंडागांव डिप्टी चीफ प्रभा मिश्रा सम्मलित रहे।

बैठक का उद्देश्य जेलों में निरूद्ध विचाराधीन बंदियों के मामलों की समीक्षा करना जिसमें विचाराधीन बंदी के प्रकरण का समय-समय पर समीक्षा करना, तथा आवश्यक रूप से जेल में बंद बंदियों को रिहा कराने में सहायता करना और धारा 436A,405 प्रक्रिया संहिता (धारा 379 भारतीय न्याय संहिता 2023) के प्रकरण मे विचार कर उसे शीघ्र निराकरण हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान करना था।

बैठक में अण्डर ट्रायल रिव्यू कमेटी के द्वारा विभिन्न प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा करते हुए उन बंदियों के मामलों पर विशेष ध्यान दिया गया जो लम्बे समय से विचाराधीन है तथा जिनके प्रकरणों में विधिक सहायता अथवा त्वरित सुनवाई की आवश्यकता है। बैठक के दौरान पात्र बंदियों को जमानत, रिहाई अथवा अन्य वैधानिक लाभ दिलाने के संबंध में आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने पर भी बल दिया गया।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोण्डागांव खिलावन राम रीगरी द्वारा समस्त अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि ऐसे प्रकरणों में त्वरित समवन्य स्थापित कर लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए, जिससे न्याय प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि भविष्य ने इस प्रकार की समीक्षा बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी, ताकि विचाराधीन बंदियों के अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

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