Anp News Live Korba हरकिशन पब्लिक स्कूल, टी.पी. नगर, कोरबा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय में पॉट डेकोरेशन प्रतियोगिता, दही हांडी सहित विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं तथा भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके आदर्शों से परिचित कराना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। विद्यार्थियों ने श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, उनके जीवन प्रसंगों और शिक्षाओं पर आधारित मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों से विद्यालय परिसर भक्तिमय वातावरण में रंग गया। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की।
जन्माष्टमी उत्सव के दौरान आयोजित पॉट डेकोरेशन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा और रचनात्मक सोच का प्रदर्शन किया। उन्होंने रंग-बिरंगे सजावटी सामान, पारंपरिक कलाकृतियों तथा श्रीकृष्ण से जुड़े विषयों के आधार पर आकर्षक मटकियां सजाईं। विद्यार्थियों की सजाई गई मटकियों में उनकी कल्पनाशीलता और कला के प्रति रुचि स्पष्ट दिखाई दी।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण दही हांडी समारोह रहा। विद्यार्थियों ने इस गतिविधि में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए टीम भावना, सहयोग और सामूहिक प्रयास का परिचय दिया। दही हांडी के माध्यम से विद्यार्थियों को एकता, अनुशासन और मिल-जुलकर लक्ष्य प्राप्त करने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य श्री रविंद्र सिंह ने विद्यार्थियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन सत्य, कर्म, प्रेम, धैर्य, अनुशासन और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने विद्यार्थियों की रचनात्मकता और उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्राचार्य ने विद्यार्थियों को भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा आपसी प्रेम, सहयोग, एकता और सद्भावना के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का समापन श्रीकृष्ण के आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने के संदेश के साथ हुआ। पूरे आयोजन में विद्यार्थियों, शिक्षकों और विद्यालय परिवार का उत्साह देखते ही बना। जन्माष्टमी उत्सव ने विद्यार्थियों को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ रचनात्मकता, अनुशासन और सामूहिक सहभागिता का अनुभव भी कराया।
