कोरबा जिले के हरदीबाजार क्षेत्र से सहकारी समिति में धान खरीदी से जुड़ी वित्तीय अनियमितता का बड़ा मामला सामने आया है। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित उतरदा में धान खरीदी के दौरान करीब 25 लाख रुपये की गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद मामले की जांच कराई गई, जिसमें फिलहाल 8 लाख 82 हजार 685 रुपये 70 पैसे की वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई है।
जांच में समिति के तत्कालीन प्रबंधक तुलाराम यादव, पर्यवेक्षक जमाल खान और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की हरदीबाजार शाखा के प्रबंधक अजय साहू की भूमिका प्रथमदृष्टया संदिग्ध एवं उत्तरदायित्वपूर्ण पाई गई है।
25 लाख रुपये की गड़बड़ी की शिकायत से शुरू हुआ पूरा मामला
मिली जानकारी के अनुसार, आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित उतरदा, हरदीबाजार में धान खरीदी से संबंधित वित्तीय मामलों को लेकर अरुण कुमार राठौर द्वारा शिकायत की गई थी। शिकायत में करीब 25 लाख रुपये की वित्तीय गड़बड़ी और अनियमितता का आरोप लगाया गया था।
शिकायत के बाद संबंधित अधिकारियों के निर्देश पर जांच दल का गठन किया गया। जांच दल में संतोष कुमार कंवर, वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक एवं दल प्रभारी, श्रीमती सुभद्रा सिदार, सहकारी निरीक्षक तथा भूपेन्द्र कुमार साहू, सहकारी निरीक्षक शामिल थे।
जांच दल ने समिति के वित्तीय अभिलेखों, भुगतान से संबंधित दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की। जांच के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई।
समिति के खाते से प्रबंधक के निजी खाते में पहुंचे 3 लाख 79 हजार रुपये
जांच के दौरान सबसे महत्वपूर्ण मामला समिति के खाते से तत्कालीन समिति प्रबंधक के व्यक्तिगत बैंक खाते में राशि ट्रांसफर किए जाने का सामने आया।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार, समिति के खाते से तत्कालीन समिति प्रबंधक तुलाराम यादव के व्यक्तिगत खाते में 3 लाख 79 हजार 511 रुपये स्थानांतरित किए गए।
सबसे गंभीर बात यह बताई गई कि जांच के दौरान इस राशि को किस मद में खर्च किया जाना था, इसका स्पष्ट उल्लेख समिति की कार्यवाही पंजी में नहीं मिला।
यानी समिति के खाते से राशि एक व्यक्तिगत खाते में ट्रांसफर हुई, लेकिन उस राशि के उपयोग को लेकर आवश्यक रिकॉर्ड और स्पष्ट विवरण जांच के दौरान उपलब्ध नहीं पाया गया।
इस मामले में जांच दल ने तत्कालीन समिति प्रबंधक तुलाराम यादव के साथ पर्यवेक्षक जमाल खान और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की हरदीबाजार शाखा के प्रबंधक अजय साहू की भूमिका को भी जिम्मेदारी वाली माना है।
धान खरीदी के खर्च में निर्धारित मानक से 3.74 लाख रुपये ज्यादा
जांच में धान खरीदी से जुड़े विभिन्न मदों में किए गए भुगतान की भी जांच की गई।
इसमें हमाली, तौलाई, बारदाना रिपेयरिंग, स्टैकिंग, स्टेंसिल और चौकीदार सहित कई मद शामिल थे।
जांच के अनुसार, 27 मार्च 2026 को इन मदों में कुल 26 लाख 12 हजार 688 रुपये का भुगतान दर्शाया गया था।
जब इस खर्च की तुलना शासन द्वारा निर्धारित मानकों से की गई, तो 3 लाख 74 हजार 374 रुपये 70 पैसे का अतिरिक्त व्यय पाया गया।
जांच दल ने इस अतिरिक्त राशि को समिति को हुई आर्थिक क्षति मानते हुए इसे वसूली योग्य राशि बताया है।
अमानत खाते से नियम विरुद्ध 1 लाख 20 हजार रुपये निकालने का आरोप
मामले की जांच में समिति के अनिवार्य अमानत खाते से भी राशि निकाले जाने का मामला सामने आया।
जांच प्रतिवेदन के मुताबिक, इस खाते से 1 लाख 20 हजार रुपये की निकासी की गई, लेकिन इस राशि के खर्च को लेकर आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट नहीं मिली।
जांच में राशि खर्च करने की स्वीकृति, संबंधित आदेश और कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं पाए गए।
इसके अलावा जांच दल द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण के दौरान कुछ कार्यों के वास्तविक अस्तित्व को लेकर भी सवाल सामने आए।
इस पूरे मामले में वैकल्पिक कर्मचारी से लिए गए कोरे चेक के उपयोग में भी अनियमितता पाए जाने की बात जांच प्रतिवेदन में कही गई है।
किसानों की हिस्सा अमानत राशि में भी मिली गड़बड़ी
जांच का दायरा सिर्फ समिति के खर्च तक सीमित नहीं रहा। किसानों से ली जाने वाली हिस्सा अमानत राशि की भी जांच की गई।
जांच में सामने आया कि किसानों से ली गई हिस्सा अमानत राशि को निर्धारित समय पर समिति के खाते में जमा नहीं किया गया।
बोईदा के दो किसानों की 5 हजार रुपये की हिस्सा राशि से संबंधित मामला सामने आया। इसके अलावा समिति के अभिलेखों में कुल 3 हजार 800 रुपये की विसंगति भी पाई गई।
बिना सक्षम अनुमोदन राशि आहरण पर भी उठे सवाल/जांच के दौरान वित्तीय लेन-देन की प्रक्रिया को लेकर भी कई गंभीर सवाल सामने आए।
जांच प्रतिवेदन में कहा गया है कि कुछ मामलों में सक्षम स्तर से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त किए बिना राशि का आहरण किया गया और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
जांच दल ने इन मामलों को गंभीर प्रक्रियात्मक और प्रशासनिक लापरवाही माना है।
सहकारी समिति जैसी संस्था में जहां किसानों से जुड़े वित्तीय लेन-देन और सरकारी व्यवस्था के तहत धान खरीदी का काम होता है, वहां इस तरह की अनियमितताओं को जांच दल ने गंभीरता से लिया है।
जांच में तीन लोगों की भूमिका प्रथमदृष्टया जिम्मेदार
पूरे मामले की जांच के बाद तत्कालीन समिति प्रबंधक तुलाराम यादव, पर्यवेक्षक जमाल खान और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक हरदीबाजार शाखा के प्रबंधक अजय साहू की भूमिका प्रथमदृष्टया संदिग्ध एवं उत्तरदायित्वपूर्ण पाई गई।
जांच में सामने आए वित्तीय लेन-देन, भुगतान और प्रक्रिया संबंधी अनियमितताओं के आधार पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय किए जाने की अनुशंसा की गई है।
हालांकि, अंतिम जिम्मेदारी और वास्तविक आर्थिक नुकसान की स्थिति आगे होने वाले विशेष अंकेक्षण और संबंधित कार्रवाई के बाद और स्पष्ट होगी।
जांच पूरी होने के बाद मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की गई।
10 जुलाई 2026 को उप आयुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक, कोरबा द्वारा कलेक्टर को पत्र भेजा गया।
इस पत्र के माध्यम से जांच में सामने आई अनियमितताओं, संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी तथा दोषियों से राशि की वसूली और कानूनी कार्रवाई से संबंधित जानकारी दी गई।
वहीं मामले में बैंक कैडर के कर्मचारी की भूमिका भी सामने आने के कारण जांच प्रतिवेदन को आगे की कार्रवाई के लिए संयुक्त आयुक्त सहकारिता, बिलासपुर को भेजा गया।
16 जुलाई को तीनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश
इसके बाद 16 जुलाई 2026 को संयुक्त आयुक्त सहकारिता एवं संयुक्त पंजीयक, बिलासपुर द्वारा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पत्र जारी किया गया।
इस पत्र में तत्कालीन समिति प्रबंधक तुलाराम यादव, पर्यवेक्षक जमाल खान और बैंक शाखा प्रबंधक अजय साहू के खिलाफ सेवा नियमानुसार कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
इस कार्रवाई के बाद अब संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों पर विभागीय स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर बनी हुई है।
विशेष अंकेक्षण से खुलेगा वास्तविक नुकसान का पूरा राज
जांच प्रतिवेदन में छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 58(बी) के तहत विशेष अंकेक्षण कराने की अनुशंसा भी की गई है।
विशेष अंकेक्षण के माध्यम से धान खरीदी वर्ष 2025-26 में समिति को हुए वास्तविक आर्थिक नुकसान का आकलन किया जाएगा।
इसके साथ ही किस स्तर पर कितनी जिम्मेदारी बनती है, कौन-कौन सी राशि वसूली योग्य है और मूल शिकायत में लगाए गए बाकी आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है, यह भी और स्पष्ट होने की संभावना है।
25 लाख के आरोप से 8.82 लाख की पुष्टि, बाकी रकम पर अभी सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मूल शिकायत में करीब 25 लाख रुपये की गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था, जबकि वर्तमान जांच में 8 लाख 82 हजार 685 रुपये 70 पैसे की वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई है।
ऐसे में मूल शिकायत में लगाए गए बाकी आरोपों की स्थिति क्या है और समिति को वास्तविक आर्थिक नुकसान कितना हुआ है, इसका जवाब विशेष अंकेक्षण के बाद सामने आने की संभावना है।
फिलहाल जांच प्रतिवेदन में जिन वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई है, उनमें समिति के खाते से व्यक्तिगत खाते में राशि ट्रांसफर, निर्धारित मानकों से अधिक खर्च, अमानत खाते से निकासी, किसानों की हिस्सा अमानत राशि में विसंगति और बिना सक्षम अनुमोदन राशि आहरण जैसे मामले शामिल हैं।
अब विशेष अंकेक्षण और विभागीय कार्रवाई पर टिकी नजर
हरदीबाजार की उतरदा सहकारी समिति में सामने आई इस वित्तीय अनियमितता के मामले में जांच के बाद कार्रवाई के निर्देश तो जारी हो चुके हैं, लेकिन पूरे मामले की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है।
विशेष अंकेक्षण के बाद वास्तविक आर्थिक नुकसान और जिम्मेदारी की अंतिम स्थिति सामने आने की उम्मीद है।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग आगे क्या कार्रवाई करता है और समिति को हुई आर्थिक क्षति की कितनी राशि की वसूली की जाती है।
