बाल विवाह के खिलाफ सक्ती में जागरूकता अभियान, विद्यार्थियों को बताए कानूनी प्रावधान

Anp News Live Janjgir Champa बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर रोक लगाने और बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिवनी और हाई स्कूल कुलीपोटा में बाल विवाह रोकथाम एवं बाल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन कलेक्टर जनमेजय महोबे के निर्देशन तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग अनीता अग्रवाल के मार्गदर्शन में किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को बाल विवाह से होने वाले सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य संबंधी नुकसान के साथ-साथ इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।

बाल विवाह कानूनन अपराध

जिला बाल संरक्षण अधिकारी गजेन्द्र जायसवाल ने विद्यार्थियों को बताया कि कम उम्र में विवाह होने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है और उनके स्वास्थ्य तथा भविष्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने बाल विवाह को कानूनन अपराध बताते हुए विद्यार्थियों को इससे जुड़े प्रावधानों के बारे में विस्तार से समझाया।

कार्यक्रम में बताया गया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत विवाह के लिए बालिका की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और बालक की न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित है। निर्धारित उम्र से पहले विवाह कराना, उसमें सहयोग करना या उसे बढ़ावा देना कानून के तहत दंडनीय है।

बाल विवाह की सूचना तत्काल देने की अपील

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से कहा गया कि यदि उनके आसपास कहीं किसी नाबालिग का विवाह कराया जा रहा हो या बाल विवाह की जानकारी मिले, तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों को दें। इसके लिए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस अथवा महिला एवं बाल विकास विभाग से संपर्क किया जा सकता है।

विद्यार्थियों ने खुद की 1098 कॉल की टेस्टिंग

कार्यक्रम को व्यावहारिक रूप देने के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन टीम ने विद्यार्थियों को 1098 सेवा की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी। इसके बाद कॉल टेस्टिंग भी कराई गई, जिसमें विद्यार्थियों ने स्वयं 1098 पर कॉल कर सेवा के बारे में जानकारी प्राप्त की।

इस दौरान बच्चों को यह समझाया गया कि किसी आपात स्थिति में सहायता कैसे मांगी जा सकती है और जरूरत पड़ने पर चाइल्ड हेल्पलाइन तक किस प्रकार पहुंचा जा सकता है।

कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाओं और विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। उपस्थित विद्यार्थियों ने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता फैलाने में सहयोग करने का संकल्प लिया।

 

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