कोंडागांव, 15 दिसंबर 2025 | कोंडागांव जिले सहित पूरे बस्तर संभाग के दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कार्यरत डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को CRMC (दुर्गम क्षेत्र प्रोत्साहन) राशि का लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। जानकारी के अनुसार बस्तर संभाग के अधिकांश जिलों में लगभग एक वर्ष से सीआरएमसी भुगतान लंबित है, जबकि कोंडागांव जिले में करीब 9 महीनों से स्वास्थ्य कर्मियों को यह राशि नहीं मिली है, जिससे कर्मचारियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
लंबित भुगतान के विरोध में डॉक्टरों ने कड़ा रुख अपनाते हुए आज 15 दिसंबर 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इसके तहत सुबह और शाम संचालित होने वाली OPD सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार किया गया है।

ओपीडी सेवाएं ठप, आपातकालीन सेवाएं जारी
डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की संयुक्त संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि जब तक लंबित सीआरएमसी प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। हड़ताल के चलते जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद हैं। इससे सामान्य इलाज और नियमित जांच के लिए आए मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, हालांकि आपातकालीन सेवाएं फिलहाल चालू रखी गई हैं।

बकाया राशि का बड़ा आंकड़ा
संघर्ष समिति द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार प्रत्येक डॉक्टर का लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये तक का भुगतान लंबित है, वहीं नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का 30 से 40 हजार रुपये तक बकाया बताया गया है। इतने लंबे समय से भुगतान अटका रहने से कर्मचारियों में असंतोष और निराशा लगातार बढ़ती जा रही है।
कोंडागांव में व्यापक असर

हड़ताल का सबसे अधिक असर बस्तर संभाग के दूरस्थ, दुर्गम और नक्सल प्रभावित इलाकों में देखने को मिल रहा है। कोंडागांव जिले के सभी प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और चिकित्सा स्टाफ ने एकजुट होकर आंदोलन में भाग लिया, जिससे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग चरमरा गई है।
स्वास्थ्य कर्मियों का मनोबल गिरा

डॉक्टरों और कर्मचारियों का कहना है कि वे नक्सल प्रभावित, दुर्गम और जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में लगातार सेवा दे रहे हैं, इसके बावजूद शासन द्वारा उनकी अनदेखी की जा रही है। लंबे समय से सीआरएमसी भुगतान न होने से स्वास्थ्य कर्मियों का मनोबल गिरा है और वे स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
संघर्ष समिति के एक सदस्य ने कहा,
“हम जान जोखिम में डालकर सेवा देते हैं, लेकिन जब महीनों तक मेहनत का हक नहीं मिलता तो मजबूरी में आंदोलन करना पड़ता है।”

गरीब और आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ा संकट
इस हड़ताल से बस्तर संभाग के दूर-दराज इलाकों में रहने वाले गरीब और आदिवासी समुदाय के लोगों के लिए स्वास्थ्य संकट और गहरा गया है। मरीजों और उनके परिजनों ने राज्य सरकार से शीघ्र सीआरएमसी भुगतान कर डॉक्टरों की मांगें पूरी करने और स्वास्थ्य सेवाएं बहाल करने की मांग की है।
सरकार पर बढ़ा दबाव
अनिश्चितकालीन ओपीडी बहिष्कार के चलते राज्य सरकार पर तत्काल हस्तक्षेप का दबाव बढ़ गया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अब देखना यह है कि शासन इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए कब ठोस कदम उठाता है।
