रायगढ़-लंबे समय से तनाव, टकराव और तीखे विरोध प्रदर्शनों के लिए पहचाने जाने वाले धरना-प्रदर्शनों के बीच इस बार तमनार सीएचपी चौक (लिबरा) के धरना स्थल से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे माहौल को ही बदल कर रख दिया। धरना स्थल से सामने आए एक वीडियो में ग्रामीणों के साथ पुलिस और प्रशासन के अधिकारी एक ही पंक्ति में खड़े होकर भोजन लेते और साथ बैठकर भोजन करते नजर आ रहे हैं। यह दृश्य देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और जिले ही नहीं, बल्कि प्रदेश भर में चर्चा का विषय बन गया।
धरने पर बैठे ग्रामीणों के लिए तैयार किए गए भोजन में किसी तरह का भेदभाव नहीं है। न अलग से कोई विशेष व्यवस्था और न ही किसी तरह का औपचारिक दिखावा। वर्दी में मौजूद पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी भी आम ग्रामीणों की तरह लाइन में लगकर भोजन लेते दिखाई देते हैं। यही सादगी, सहजता और मानवीयता इस पूरे दृश्य को खास और यादगार बना रही है।
तनाव के बीच संवाद की नई मिसाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि आमतौर पर धरना-प्रदर्शनों के दौरान प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच दूरी, अविश्वास और तनाव का माहौल बन जाता है। कई बार हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि बातचीत के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं। लेकिन इस दृश्य ने दोनों पक्षों के बीच मानवीय संवाद की एक नई मिसाल पेश की है। ग्रामीणों का मानना है कि इस छोटे से कदम ने माहौल को नरम किया और बातचीत का रास्ता खोला।
धरना स्थल पर मौजूद कुछ ग्रामीणों ने बताया कि जब अधिकारी उनके साथ बैठकर भोजन करते नजर आए, तो यह एहसास हुआ कि उनकी बात सुनी जा रही है। इससे नाराजगी और तनाव में काफी कमी आई। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए लिखा कि ऐसी घटनाएं ही प्रशासन और जनता के बीच विश्वास की नींव मजबूत करती हैं।
औपचारिक कार्यक्रम नहीं, स्वाभाविक क्षण
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह कोई पूर्व नियोजित या औपचारिक कार्यक्रम नहीं था। परिस्थितियों के बीच यह एक स्वाभाविक और सहज क्षण था, जो खुद-ब-खुद बन गया। अधिकारियों का कहना है कि धरने पर बैठे लोगों के साथ समय बिताना, उनकी बात सुनना और उनके साथ एक जैसा व्यवहार करना हालात को समझने में मदद करता है और टकराव की बजाय संवाद को बढ़ावा देता है।
संवेदनशीलता से संभल सकते हैं हालात
आज के समय में जब धरना-प्रदर्शन अक्सर नारेबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और टकराव तक सीमित रह जाते हैं, ऐसे में तमनार सीएचपी चौक से सामने आया यह दृश्य एक सकारात्मक संदेश देता है। यह बताता है कि संवेदनशीलता, संवाद और मानवीय व्यवहार से भी जटिल हालात संभाले जा सकते हैं।
धरना स्थल से आई यह तस्वीर सिर्फ एक वायरल तस्वीर भर नहीं है, बल्कि यह प्रशासन और जनता के रिश्तों पर एक सकारात्मक सवाल भी छोड़ गई है—क्या संवाद, विश्वास और संवेदनशीलता ही आगे का रास्ता हो सकता है?
