कर्नाटक सरकार के डेवलेपमेंट कमिश्नर ने देखी भड़ोखर की हवेली,विकसित सामुदायिक तालाब का किया  निरीक्षण

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टहरौली झांसी: कर्नाटक सरकार के वाटरशेड डेवलपमेंट डिपार्टमेंट, बंगलुरु से कमिश्नर उपेंद्र प्रताप सिंह (आई.एफ.एस.) एवं निदेशक डॉ. परवेज़ बंथनल शुक्रवार को वर्षा जल संचयन कार्यों को देखने के लिए झांसी जनपद के दौरे पर पहुँचे। उनका उद्देश्य इक्रीसेट के नेतृत्व में डॉ. रमेश सिंह, प्रधान वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष द्वारा टहरौली की 40 गांवों में संचालित वाटरशेड विकास कार्यों का प्रत्यक्ष अवलोकन करना था। कर्नाटक के इन वरिष्ठ अधिकारियों का प्रमुख लक्ष्य यह समझना था कि टहरौली मॉडल को सूखा-प्रभावित इलाकों में कैसे लागू किया जा सकता है। विशेष रूप से, वे यह जानना चाहते थे कि लैंड रिसोर्स इन्वेंट्री (LRI) और जल विज्ञान के उपयोग द्वारा भूजल उपलब्धता किस प्रकार बढ़ाई जा सकती है और किस प्रकार से परती भूमि को खेती योग्य बनाया जा सकता है।

भ्रमण के दौरान दल ने ग्राम नोटा में इक्रिसेट परियोजना के अंतर्गत विकसित सामुदायिक तालाब का निरीक्षण किया और कृषि विभाग, झांसी जनपद के वरिष्ठ अधिकारियों एवं किसानों से संवाद किया। इसके बाद ग्राम भडोखर में वर्षा जल संचयन के लिए निर्मित हवेली देखी तथा यह जाना कि जलविज्ञान आधारित उपायों से किसानों की उत्पादकता और आय में कैसे वृद्धि की जा सकती है। भडोखर में अधिकारियों ने प्राकृतिक संसाधन संरक्षण समिति-टहरौली, प्रोग्रेसिव बुंदेलखंड किसान उत्पादक संगठन-टहरौली और स्थानीय किसानों से विस्तृत चर्चा की तथा इक्रीसेट द्वारा किए गए कार्यों से किसानों को हुए प्रत्यक्ष लाभ की जानकारी प्राप्त की।

दौरे के दौरान इक्रीसेट की ओर से प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रमेश सिंह एवं डॉ. अनंता, सलाहकार आर. के. उत्तम, सहायक वैज्ञानिक डॉ. अशोक शुक्ला, अरुण शेषाद्री, साइंटिफिक ऑफिसर सुनील कुमार निरंजन, इंजीनियर आनंद कुमार सिंह, इंजीनियर दीपक त्रिपाठी, शिशुवेंद्र कुमार, विजय सिंह, इंजीनियर ललित, शैलेन्द्र सोनी, सतेंद्र राणा, राकेश कुमार, अनिल सिंह एवं प्राकृतिक संसाधन संरक्षण समिति से अध्यक्ष आशीष उपाध्याय, रामेश्वर शर्मा बकायन, पुष्पेन्द्र बुंदेला, संजीव बिरथरे,दीनदयाल पटेल, मुन्ना लाल उपाध्याय, नातीराजा बुंदेला, गौरव यादव सहित अन्य कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

कमिश्नर और निदेशक ने इसके अतिरिक्त बामौर ब्लॉक के ग्राम सुट्टा-सिंगार में भी इक्रीसेट द्वारा पूर्व में किए गए कार्यों का अवलोकन किया। यहाँ उन्होंने किसानों से उनके जीवन में आए बदलाव के बारे में जानकारी ली और कहा कि इस प्रकार के सफल मॉडल कर्नाटक प्रदेश के सूखा-प्रभावित क्षेत्रों में भी अपनाए जा सकते हैं। दोनों अधिकारियों ने इक्रीसेट की पहल की सराहना करते हुए इसे जल प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका सुधार का सशक्त उदाहरण बताया।

 

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