35 वर्षों से मानव सेवा में समर्पित ‘ज्योतिर्गमय आश्रम’, आस्था के साथ जागरूकता का भी दे रहा संदेश

बलौदाबाजार में आचार्य पंडित प्रकाश शुक्ल ‘गुरुजी’ के मार्गदर्शन में संचालित आश्रम का उद्देश्य—मानव कल्याण, नशामुक्ति और अंधश्रद्धा उन्मूलन

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अवास कैवर्त/बलौदाबाजार, छत्तीसगढ़।

मानव सेवा को सर्वोपरि मानते हुए बलौदाबाजार में स्थित ज्योतिर्गमय आश्रम पिछले करीब 35 वर्षों से निस्वार्थ भाव से मानव कल्याण के लिए कार्य कर रहा है। आचार्य पंडित प्रकाश शुक्ल जी, जिन्हें श्रद्धालु प्रेमपूर्वक ‘गुरुजी’ के नाम से संबोधित करते हैं, के मार्गदर्शन में संचालित यह आश्रम जाति-पाति, ऊंच-नीच और भेदभाव से ऊपर उठकर लोगों में सेवा, जागरूकता और सकारात्मक सोच का संदेश देने का प्रयास करता है।

गुरुजी का स्पष्ट कहना है कि बीमारी का इलाज अनुभवी एवं योग्य चिकित्सक से ही कराया जाना चाहिए। वहीं उनका मानना है कि वैदिक धर्मग्रंथों और हमारी पारंपरिक जीवनशैली में वर्णित कई औषधीय एवं घरेलू उपचारों का भी अपना महत्व रहा है। उनका संदेश है कि किसी एक बीमारी के लिए केवल एक ही प्रकार की चिकित्सा को अंतिम समाधान मानना उचित नहीं है, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार उचित सलाह और उपचार को महत्व दिया जाना चाहिए।

वे उदाहरण देते हुए कहते हैं कि पैर में मोच आने पर घर की बुजुर्ग मां द्वारा हल्दी और तेल का लेप करना भी पारंपरिक उपचार का एक रूप है। इसी तरह यंत्र, मंत्र, तंत्र और पूजा-पाठ के माध्यम से व्यक्ति की आस्था और मनोबल मजबूत होने की बात भी कही जाती है। हालांकि आश्रम की ओर से लोगों को अंधविश्वास और झाड़-फूंक के नाम पर होने वाले शोषण से बचने के लिए भी जागरूक किया जाता है।

झाड़-फूंक और टोने-टोटके के नाम पर ठगी से बचने की अपील

आश्रम की ओर से विशेष रूप से लोगों को चेताया जाता है कि झाड़-फूंक, टोना-टोटका और जादू के नाम पर कई लोग भ्रम और भय के जाल में फंसकर आर्थिक एवं मानसिक रूप से बड़ा नुकसान उठा लेते हैं। ऐसे मामलों में लोगों को सावधानी बरतने और किसी भी गंभीर समस्या में योग्य विशेषज्ञ की सलाह लेने का संदेश दिया जाता है।

नशामुक्ति और अंधश्रद्धा उन्मूलन भी प्रमुख उद्देश्य

ज्योतिर्गमय आश्रम का मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं बताया जाता, बल्कि नशामुक्ति, अंधश्रद्धा उन्मूलन, सनातन धर्मग्रंथों के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना और समाज में जागृति लाना भी इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं।

आश्रम से जुड़े लोगों के अनुसार, यहां पिछले 35 वर्षों से प्रत्येक गुरुवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ दूसरे प्रदेशों से भी लोग यहां आते हैं। गुरुवार को आश्रम में सैकड़ों लोगों की उपस्थिति देखी जाती है, जो आश्रम और गुरुजी के प्रति लोगों की आस्था एवं विश्वास को दर्शाती है।

‘निस्वार्थ सेवा ही सबसे बड़ा धर्म

आश्रम का कहना है कि पिछले 35 वर्षों से मानव कल्याण की दिशा में किए जा रहे कार्यों के दौरान यहां किसी व्यक्ति से किसी भी प्रकार का दान, दक्षिणा या सहयोग नहीं लिया गया है। सेवा को ही सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए आश्रम समाज में सकारात्मक सोच और मानवता का संदेश देने का प्रयास कर रहा है।

गुरुजी का संदेश है कि निस्वार्थ भाव से की गई सेवा का फल एक न एक दिन अवश्य मिलता है। यही भावना ज्योतिर्गमय आश्रम की सेवा यात्रा का आधार बताई जाती है।

श्रद्धालुओं के बीच आश्रम के प्रति विश्वास और जुड़ाव को गुरुजी मां भगवती श्री शववाहिनी काली मां के आशीर्वाद का परिणाम मानते हैं।

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