महिलामन एकजुट होके बोइन जवारा, हरछट के दिन होही विसर्जन
जनपद सदस्य गायत्री मार्को घलो रहिन मौजूद, गांव के महिलामन संग मिलके बोइन जवारा

महिलामन देवी गीत अऊ जस गीत गाके, ढोलकी के थाप मं निभावत हें लोकपरंपरा
संवाददाता/आशीष श्रीवास/मरवाही
बंशीताल ( दानीकुण्डी ) गांव मं आज महिला मन एकजुट होके जवारा बोए के परंपरा निभाइन। एहू कार्यक्रम मं जनपद सदस्य गायत्री मार्को घलो उपस्थित रहिन अऊ गांव के सबों महिला मन संग मिलके जवारा बोइन। महिलामन मिल-जुलके विधि-विधान ले पूजा-पाठ करिन अऊ जवारा बोइन। जवारा बोए के बाद महिला मन एके जगह मं एक साथ बइठके देवी गीत अऊ जस गीत गाइन। ढोलकी के थाप मं भक्ति के रंग जम गे अऊ पूरा माहौल भक्तिमय हो गे।

गांव के महिला मन बर जवारा बोना सिरिफ पूजा-पाठ के परंपरा नइ, बल्कि एक-दूसर ले जुड़के अपन सुख-दुख बांटे अऊ मिल-जुलके समय बिताए के अवसर घलो आय। रोज के घर-गृहस्थी के काम ले कुछ बेरा निकालके महिला मन एक संग बइठथें, देवी गीत अऊ जस गीत गावत-गावत अपन समय बिताथें। एकर ले गांव के आपसी भाईचारा अऊ एकता घलो मजबूत होथे।

गांव के मान्यता अनुसार जवारा ला हरियाली, अन्न-धन अऊ सुख-समृद्धि के प्रतीक माने जाथे। जवारा बोए के बाद ओकर रोज पूजा-अर्चना अऊ देखरेख करे जाथे। हरछट के दिन जवारा के विधि-विधान ले पूजा करके नदी, तालाब या कोनो पवित्र जल-स्थान मं विसर्जन करे जाही।

लोकमान्यता आय कि जवारा के हरियर होए ले घर-परिवार मं सुख-शांति, बरकत अऊ समृद्धि बने रहिथे। खेती-किसानी प्रधान गांव मं जवारा के संबंध धरती, अन्न अऊ अच्छी फसल के कामना ले घलो जोड़ के देखे जाथे।
हरछट के दिन होए वाला जवारा विसर्जन मं महिला मन फेर एकजुट होके पूजा-अर्चना करहीं अऊ देवी गीत-जस गीत गावत हुए श्रद्धा के संग जवारा ला विसर्जित करहीं। ये परंपरा छत्तीसगढ़ के लोकसंस्कृति, देवी भक्ति अऊ महिला मन के आपसी मेल-जोल के सुंदर उदाहरण आय।
