16 हजार किलोमीटर की साइकिल यात्रा पूरी कर MCB पहुंचे वासु राइडर, कलेक्टर ने प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित

16 हजार किलोमीटर की साइकिल यात्रा पूरी कर MCB पहुंचे वासु राइडर, कलेक्टर ने प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित

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55 से 60 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर निकले हैं वासु, अब गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की ओर बढ़ेंगे कदम

आशीष श्रीवास 
मनेंद्रगढ़/एमसीबी

हौसले बुलंद हों और लक्ष्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का हो, तो शारीरिक चुनौतियां भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। इस बात को सच साबित कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के दुर्गानगर निवासी वासु राइडर, जो पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण मुक्त भारत और सामाजिक सद्भाव का संदेश लेकर साइकिल से देशभर की यात्रा पर निकले हैं। लगभग 55 से 60 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद वासु ने अपने अदम्य साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर करीब 16 हजार किलोमीटर की साइकिल यात्रा पूरी कर छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में पहुंचे हैं। यहां जिला प्रशासन की ओर से उनका आत्मीय स्वागत किया गया और कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्रीमती संतन देवी जांगड़े ने उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

कलेक्टर ने प्रशस्ति पत्र देकर बढ़ाया उत्साह


एमसीबी जिला मुख्यालय में वासु राइडर की प्रेरणादायक यात्रा और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कलेक्टर संतन देवी जांगड़े ने उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। प्रशस्ति पत्र में वासु द्वारा पर्यावरण संरक्षण तथा युवाओं को नशामुक्त करने की दिशा में जागरूकता फैलाने के लिए की जा रही अभिनव पहल का उल्लेख किया गया है।

कलेक्टर ने उनकी लगभग 16 हजार किलोमीटर की साइकिल यात्रा को सराहनीय बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। जिला प्रशासन की ओर से दिया गया यह सम्मान वासु के लिए न केवल प्रोत्साहन है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

55 से 60 प्रतिशत दिव्यांगता भी नहीं रोक सकी कदम


वासु राइडर की यात्रा इसलिए भी खास है, क्योंकि वे जन्म से ही लगभग 55 से 60 प्रतिशत दिव्यांगता से जूझ रहे हैं। सामान्य परिस्थितियों में भी लंबी दूरी की साइकिल यात्रा चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन वासु ने अपनी शारीरिक सीमाओं को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ देश के विभिन्न हिस्सों में साइकिल चलाकर लोगों को जागरूक करने का बीड़ा उठाया है।

वासु की यह पहल उन युवाओं और लोगों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। उनकी यात्रा संदेश देती है कि शारीरिक चुनौतियां किसी व्यक्ति के हौसले, संकल्प और समाज के लिए कुछ करने की भावना से बड़ी नहीं होतीं।

2 जून 2025 से शुरू किया अभियान, देशभर में दे रहे जागरूकता का संदेश


प्राप्त जानकारी के अनुसार, वासु राइडर ने 2 जून 2025 से तिरंगा लेकर अपनी साइकिल यात्रा शुरू की थी। उनका उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचकर पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण मुक्त भारत, सामाजिक सद्भाव और नशामुक्ति के प्रति लोगों को जागरूक करना है।

यात्रा के दौरान वे स्कूलों, कॉलेजों और आम नागरिकों से संवाद कर रहे हैं। वे लोगों को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझाने के साथ ही स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त वातावरण के महत्व से अवगत करा रहे हैं। विभिन्न स्थानों पर उन्हें स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों का सहयोग एवं प्रोत्साहन भी मिल रहा है।

पूर्व में प्रकाशित समाचारों के अनुसार, वासु कई राज्यों और उत्तर प्रदेश के लगभग 60 जिलों का भ्रमण कर चुके हैं। उन्होंने करीब 450 विद्यालयों में जाकर विद्यार्थियों के बीच पर्यावरण जागरूकता का संदेश पहुंचाया है। इस दौरान वे बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए जानकारीपरक सामग्री भी वितरित करते रहे हैं।

पेट्रोल-डीजल से होने वाले प्रदूषण को कम करने की अपील
वासु राइडर अपनी साइकिल यात्रा के माध्यम से ईंधन से चलने वाले वाहनों के अत्यधिक उपयोग को कम करने और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने की अपील कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि लोग छोटी दूरी के लिए साइकिल का उपयोग करें और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें, तो प्रदूषण कम करने की दिशा में सार्थक प्रयास किया जा सकता है।

उनका अभियान केवल साइकिल यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से वे समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने और युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने का प्रयास भी कर रहे हैं। यही वजह है कि उनकी यात्रा को विभिन्न स्थानों पर सराहना मिल रही है।

मनेंद्रगढ़ से गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की ओर बढ़ेगा कारवां
एमसीबी जिले में सम्मान प्राप्त करने के बाद अब वासु राइडर की यात्रा का अगला पड़ाव गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वे मनेंद्रगढ़ से आगे बढ़ते हुए 10 अगस्त को गौरेला पहुंचने की बात सामने आई है। हालांकि, उनके आगमन की सटीक तारीख की स्थानीय स्तर पर पुष्टि की जानी बाकी है।

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही पहुंचने पर भी उनके अभियान को लेकर स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों में उत्सुकता रहने की उम्मीद है। उनकी यात्रा का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति और सामाजिक सद्भाव का संदेश पहुंचाना है।

वर्ष 2028 तक यात्रा जारी रखने का लक्ष्य
वासु राइडर ने अपनी इस यात्रा को लंबे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया है। पूर्व में प्रकाशित समाचारों में उनकी यात्रा वर्ष 2028 तक जारी रहने की संभावना का उल्लेख किया गया है। वे देश के अधिक से अधिक क्षेत्रों तक पहुंचकर लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना चाहते हैं।

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एमसीबी जिले में कलेक्टर संतन देवी जांगड़े द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर किया गया सम्मान उनकी इसी प्रेरणादायक पहल को मान्यता प्रदान करता है। करीब 16 हजार किलोमीटर की साइकिल यात्रा तय कर छत्तीसगढ़ पहुंचे वासु राइडर आज इस बात की मिसाल हैं कि यदि इरादे मजबूत हों, तो शारीरिक चुनौतियां भी लक्ष्य प्राप्त करने के रास्ते में बाधा नहीं बन सकतीं।

वासु राइडर की यह यात्रा केवल दूरी तय करने का अभियान नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्त समाज और मजबूत इच्छाशक्ति का संदेश देने वाली एक प्रेरणादायक पहल है।

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