भू-अर्जन प्रक्रिया में आएगी पारदर्शिता, प्रभावित ग्रामीणों को समय पर मिलेगा उचित मुआवजा

कलेक्टर अजीत वसंत ने एसईसीएल प्रभावित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब भू-अर्जन की प्रक्रिया में परिसंपत्तियों का मूल्यांकन और मुआवजा भुगतान अधिक पारदर्शी तरीके से होगा, जिससे गाँव के मूल निवासियों को सीधा लाभ मिलेगा और शासन की बड़ी राशि की बचत भी होगी।

 

कलेक्टर द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी कंपनी एसईसीएल के कोरबा, गेवरा, कुसमुंडा और दीपका विस्तार परियोजना क्षेत्रों में परिसंपत्तियों का सर्वेक्षण ड्रोन और सैटेलाइट इमेजिंग की मदद से किया जाएगा। साथ ही मुआवजा निर्धारण भूमि अधिग्रहण के तुरंत बाद किया जाएगा, जिससे अनावश्यक विलंब और शिकायतों पर रोक लग सके।

 

उन्होंने कहा कि कुछ लोग केवल मुआवजा प्राप्त करने के उद्देश्य से शासकीय और निजी भूमि पर अस्थायी निर्माण कर लेते हैं, जिससे शासन पर वित्तीय भार बढ़ता है। नई व्यवस्था के तहत ऐसे फर्जी निर्माणों की पहचान कर उनका मुआवजा शून्य कर दिया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक परिसंपत्ति का जियो-टैग्ड फोटो और वीडियोग्राफी भी की जाएगी।

 

निर्देशों में यह भी कहा गया है कि सर्वेक्षण संयुक्त टीम द्वारा किया जाएगा, जिसमें अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और एसईसीएल कर्मचारी शामिल होंगे। मुआवजा वितरण से पहले और बाद में भौतिक सत्यापन कर मिलान किया जाएगा।

 

कलेक्टर वसंत ने एसईसीएल के महाप्रबंधकों को इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने और प्रभावित ग्रामीणों को न्याय दिलाने के लिए त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा है।

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