कोंडागांव के डोंगरीपारा में सोरी परिवार ने परंपरा के साथ मनाया नवाखाई पर्व

कोंडागांव | 4 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं और कृषि संस्कृति को जीवंत रखने वाला नवाखाई पर्व आज पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। कोंडागांव के डोंगरीपारा गांव में सोरी परिवार ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस पर्व को मनाते हुए नई फसल का स्वागत किया और क्षेत्रवासियों को बधाई दी।

 

नवाखाई पर्व का विशेष महत्व आदिवासी और ग्रामीण अंचलों में देखने को मिलता है। इस दिन परिवार के सभी सदस्य एकत्र होकर खेतों की पहली उपज को देवी-देवताओं को अर्पित करते हैं और फिर परिवारजनों के साथ उसका पावन प्रसाद ग्रहण करते हैं।

 

डोंगरीपारा स्थित सोरी परिवार ने सुबह पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना की और धान की नई फसल को देवी मां को समर्पित कर नवान्न को ग्रहण किया। परिवार के मुखिया ने कहा कि, "नवाखाई हमारी संस्कृति का प्रतीक है। यह पर्व न केवल नई फसल के स्वागत का है, बल्कि यह हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी देता है।"

 

पर्व के अवसर पर पारंपरिक व्यंजन जैसे चीला, फरा, और महुआ की मिठाइयों का भी विशेष रूप से भोग लगाया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने भी एक-दूसरे को नवाखाई की शुभकामनाएँ दीं और एकजुट होकर त्योहार को मनाया।

 

यह पर्व छत्तीसगढ़, ओड़िशा और झारखंड जैसे राज्यों में विशेष रूप से मनाया जाता है, जहाँ कृषि जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। नवाखाई न केवल अन्न की पूजा है, बल्कि यह सामाजिक एकता, सांस्कृतिक पहचान और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सम्मान का भी प्रतीक है।

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