माओवाद के साये से बाहर निकला कोण्डागांव, ₹78 करोड़ से बिछेगा 103 किमी पक्की सड़कों का जाल

कोण्डागांव, 18 मई 2026 | बस्तर संभाग में केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त नीतियों से माओवाद पर प्रभावी नियंत्रण के बाद अब विकास कार्यों ने तेजी पकड़ ली है। वर्षों तक दहशत और असुरक्षा के कारण बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में अब सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य मूलभूत सेवाएं पहुंचाने का काम युद्धस्तर पर जारी है।

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इसी क्रम में कोण्डागांव जिले के सुदूर और संवेदनशील गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है। जिन इलाकों में कभी माओवादी गतिविधियों के कारण विकास कार्य बाधित थे, वहां अब प्रगति के नए द्वार खुल रहे हैं।

 

₹78.24 करोड़ की लागत से 29 सड़कों को मंजूरी

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जिले में ग्रामीणों को बेहतर आवागमन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ₹78 करोड़ 24 लाख की लागत से 103.60 किलोमीटर लंबी 29 पक्की सड़कों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है।

 

इस परियोजना के तहत:

 

PMGSY परियोजना क्रियान्वयन इकाई, कोण्डागांव द्वारा ₹50.27 करोड़ की लागत से 68.37 किलोमीटर लंबी 19 सड़कों का निर्माण किया जाएगा।

 

क्षेत्रवार देखें तो मर्दापाल में 12 सड़कें (45 किमी), केशकाल में 11 सड़कें (39.23 किमी) और कोण्डागांव क्षेत्र में 6 सड़कें (20.36 किमी) शामिल हैं।

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इन सुदूर क्षेत्रों की बदलेगी तस्वीर

 

कार्यपालन अभियंता के अनुसार, स्वीकृत सड़कों से जिले के सबसे अंदरूनी इलाकों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

 

केशकाल एवं फरसगांव क्षेत्र

बावनमारी-बेडमामारी, बटराली होनहेड़-उपरचंदेली, होनहेड़-घोड़ाझर, बिंझे-चिखलाडीही, कलेपाल-पराली, रावबेड़ा-गिरगोली, कुवेमारी-भण्डारपाल, कुएंमारी-कुदारवाही और पतोड़ा-कुम्हारपारा सहित 11 सड़कें (39.23 किमी) बनाई जाएंगी।

 

मर्दापाल क्षेत्र

पुजारीपारा-कटुलपारा, खचगांव गोदाम-मांझीपारा, पल्ली-बरसूर मार्ग-कीलम, खोड़सानार-पदेली, मर्दापाल-बयानार मार्ग-लखापुरी, बेतबेड़ा-ढोलमांदरी और तोडम मुख्य मार्ग-मुंडापारा सहित 12 सड़कें (45 किमी) प्रस्तावित हैं।

 

कोण्डागांव क्षेत्र

क्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण और अंदरूनी हिस्सों को जोड़ने वाली 6 सड़कें (20.36 किमी) बनाई जाएंगी।

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विकास को मिलेगा नया आयाम

 

इन पक्की सड़कों के निर्माण से जिले के सामाजिक और आर्थिक ढांचे में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

 

शिक्षा और स्वास्थ्य तक आसान पहुंच: एम्बुलेंस और स्वास्थ्य सेवाएं अब गांवों तक सीधे पहुंच सकेंगी, वहीं विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज आने-जाने में सुविधा मिलेगी।

 

आर्थिक मजबूती: किसान और ग्रामीण अपनी उपज आसानी से बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे।

 

पर्यटन को बढ़ावा: बस्तर के अंदरूनी प्राकृतिक स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बल मिलेगा।

 

 

शांति और विश्वास का नया दौर

 

बस्तर में अब भय का माहौल धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के धरातल पर उतरने से ग्रामीणों का प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है। सड़क निर्माण की यह पहल कोण्डागांव को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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