मल्चिंग तकनीक से खीरे की खेती में किसान को 3.25 लाख रुपये का लाभ

आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी आमदनी में लगातार वृद्धि कर रहे हैं। सक्ती जिले के विकासखंड डभरा अंतर्गत ग्राम जवाली निवासी किसान गोपाल कृष्ण पटेल ने प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक के माध्यम से खीरे की खेती में बेहतर उत्पादन हासिल करते हुए 3.25 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। उनकी सफलता तकनीक आधारित खेती और बेहतर फसल प्रबंधन का प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है।

किसान गोपाल कृष्ण पटेल के पास एक हेक्टेयर भूमि है। वे पहले पारंपरिक तरीके से सब्जियों की खेती करते थे। इस पद्धति में सिंचाई के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती थी। साथ ही खेत में खरपतवार की समस्या, मिट्टी में नमी की कमी और बढ़ती उत्पादन लागत के कारण उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था।

इसी दौरान उद्यानिकी विभाग के तकनीकी अमले ने उन्हें प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक के फायदे बताए। विभागीय अधिकारियों ने एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत उपलब्ध मल्चिंग अनुदान की जानकारी भी दी। विभाग के मार्गदर्शन में किसान ने आधुनिक तकनीक और बेहतर फसल प्रबंधन को अपनाते हुए खीरे की खेती शुरू की।

मल्चिंग तकनीक अपनाने से पहले गोपाल कृष्ण पटेल को खीरे की खेती से लगभग 120 से 150 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता था। आधुनिक तकनीक के उपयोग के बाद उनका उत्पादन बढ़कर 200 से 250 क्विंटल तक पहुंच गया। इससे उन्हें करीब 5 लाख रुपये की बिक्री प्राप्त हुई। खेती में लगभग 1.75 लाख रुपये की लागत आने के बाद उन्हें 3.25 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिला।

किसान गोपाल कृष्ण पटेल ने बताया कि उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से उन्हें फसल का बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद मिली। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेती की तुलना में आधुनिक तकनीक से सब्जी उत्पादन करने पर उनकी आय में दो से तीन गुना तक वृद्धि हुई है।

प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक से खेत में मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है। इससे सिंचाई की आवश्यकता कम होती है और खरपतवार नियंत्रण में भी सहायता मिलती है। उत्पादन लागत को नियंत्रित करने के साथ ही फसल की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार होता है। इन लाभों के कारण किसान अब पारंपरिक पद्धति के स्थान पर तकनीक आधारित खेती की ओर बढ़ रहे हैं।

गोपाल कृष्ण पटेल की सफलता से क्षेत्र के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं। उद्यानिकी फसलों में आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कम संसाधनों में अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त करने की संभावनाएं बढ़ रही हैं। उनकी सफलता किसानों को वैज्ञानिक पद्धतियों, विभागीय मार्गदर्शन और उपलब्ध योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने का संदेश देती है।

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