घरघोड़ा में फेसबुक पोस्ट ने प्रशासन और राजनीति में बढ़ाई तनातनी

रायगढ़/घरघोड़ा — घरघोड़ा में सोशल मीडिया पर प्रकाशित एक टिप्पणी ने प्रशासन और राजनीति के बीच नई मेहनक पैदा कर दी है। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के नेता अजीत गुप्ता को शुक्रवार देर रात पुलिस ने धारा 151 के तहत हिरासत में लिया गया और उन्हें रिमांड पर भेज दिया गया है।

पुलिस और प्रशासन के अनुसार, अजीत गुप्ता ने अपने फेसबुक अकाउंट से घरघोड़ा के उप संचालक, एसडीएम दुर्गा प्रसाद अधिकारी (आईएएस) के खिलाफ एक अमर्यादित टिप्पणी पोस्ट की, जिसे प्रशासनिक गरिमा के विरुद्ध देखा गया। इस पोस्ट के आधार पर एसडीएम कार्यालय के निर्देश पर पुलिस ने कार्रवाई की और अजीत को हिरासत में लेकर रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस ने बताया कि मामला फिलहाल प्राथमिक जांच के दायरे में है और आवश्यक प्रक्रियाओं के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मामले का पृष्ठभूमि:

स्थानीय स्तर पर अजीत गुप्ता लंबे समय से एनटीपीसी परियोजना के विरोध को लेकर चर्चा में रहे हैं। परियोजना के विरोध और उससे जुड़ी राजनीतिक व सामाजिक संवेदनशीलताओं के कारण पिछले कुछ समय से इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। प्रशासन ने कहा है कि किसी भी तरह की अशोभनीय भाषा या व्यक्तिगत अधिकारियों के प्रति अवमाननापूर्ण टिप्पणियों को सहन नहीं किया जाएगा, खासकर तब जब वह सार्वजनिक शान्ति और प्रशासनिक कार्य में बाधा डालने की स्थिति पैदा कर सकती हों।

कानूनी पहलू:

धारा 151 (CrPC) के तहत की गई गिरफ्तारी अक्सर रोकथाम (preventive) के उद्देश्य से की जाती है — यानी किसी अप्रिय स्थिति या कानून-व्यवस्था भंग होने की आशंका के मद्देनज़र हस्तक्षेप करना। मामले में गिरफ्तारी के बाद आगे की जांच में आरोपों की प्रकृति और पोस्ट में प्रयुक्त भाषा के आधार पर अन्य धाराओं के लागू होने की भी संभावना हो सकती है।

स्थानीय राजनीतिक प्रतिक्रिया और स्थिति:

वर्तमान में भाजयुमो या अजीत गुप्ता की ओर से किसी आधिकारिक लिखित बयान की प्रतिलिपि उपलब्ध नहीं हुई है। भाजपा/भाजयुमो के स्थानीय नेताओं से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है; प्रतिक्रिया मिलने पर उसके अनुसार खबर अपडेट की जाएगी। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि शांति बनाये रखने और कानून के दायरे में रहकर आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कदम उठाये गये हैं।

आगे की कार्यवाही:

पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और सोशल मीडिया पोस्ट, उसके समय-स्थापना , टिप्पणी करने के रिकॉर्ड तथा संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मामले में पंचायत, स्थानीय प्रशासन और पुलिस के बीच संतुलन बनाये रखने की चुनौती भी सामने आ सकती है, खासकर तब जब यह मुद्दा किसी बड़े राजनीतिक या विकास प्रोजेक्ट (जैसे एनटीपीसी) से जुड़ा हो।

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