“ज्ञानभारतम” से डिजिटल संरक्षण: औरंगज़ेब कालीन ग्रंथ समेत 25 दुर्लभ पांडुलिपियाँ सुरक्षित

कोरबा जिले में सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। पाली विकासखंड के ग्राम शिवपुर फुलवारीपारा में “ज्ञानभारतम” राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत 368 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियाँ खोजी गई हैं, जिनका डिजिटल संरक्षण किया गया है।

दिनांक 26 अप्रैल 2026 को किए गए सर्वेक्षण के दौरान सन 1658 की हस्तलिखित पांडुलिपियाँ प्राप्त हुईं, जिन्हें मौके पर ही “ज्ञानभारतम” एप के माध्यम से डिजिटली सुरक्षित किया गया। जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह ने मोबाइल के जरिए इन अमूल्य दस्तावेजों की तस्वीरें अपलोड कर डिजिटल संरक्षण सुनिश्चित किया।

इस अभियान के तहत कुल 25 प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण और डिजिटलीकरण किया गया है। इनमें औरंगज़ेब कालीन साहित्यिक ग्रंथ “खूब तमाशा”, वर्ष 1829 का “नासकेतु”, 1831 की वैदेकीय पोथी और 1852 का “वेदारत्न पंच प्रकाश” जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ शामिल हैं। ये सभी पांडुलिपियाँ देवनागरी लिपि और संस्कृत भाषा में लिखी गई हैं, जो क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रमाण हैं।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध भाषाविद आचार्य डॉ. रमेन्द्र नाथ मिश्र विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने पांडुलिपियों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ये धरोहरें हमारे इतिहास, भाषा और संस्कृति को समझने का आधार हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने लगभग 60 वर्षों तक इन पांडुलिपियों को सहेजकर रखा है।

कार्यक्रम में डिप्टी कलेक्टर टी.आर. भारद्वाज, तहसीलदार भूषण सिंह मंडावी सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे। जिला प्रशासन द्वारा आचार्य मिश्र का सम्मान शाल एवं श्रीफल भेंट कर किया गया।

डिप्टी कलेक्टर ने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने क्षेत्र में मौजूद प्राचीन धरोहरों को नष्ट होने से बचाने के लिए इस अभियान में सक्रिय सहयोग दें। वहीं “ज्ञानभारतम” मिशन के तहत लोगों को एप डाउनलोड कर डिजिटल संरक्षण की प्रक्रिया भी समझाई गई।

कार्यक्रम में पुरातत्वविद, शोधार्थी, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए, जिन्होंने इस ऐतिहासिक पहल की सराहना की।

यह पहल न केवल कोरबा जिले की ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति और परंपरा से जोड़ने का भी एक सशक्त माध्यम साबित होगी।

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