बिलासपुर। शहर में संचालित निजी एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा संचालित स्कूलों पर लगाए जा रहे कमर्शियल टैक्स को लेकर विरोध तेज हो गया है। भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने इस व्यवस्था को शिक्षा के हितों के विपरीत बताते हुए इसे तत्काल समाप्त करने की मांग की है।
मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ के जिला संयोजक एवं पूर्व पार्षद राजेश मिश्रा, जिला सहसंयोजक विद्यानंद साहू, सहसंयोजक वेदांत शुक्ला और कोषाध्यक्ष भूषण प्रसाद पांडे ने बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्कूलों से वसूले जा रहे कमर्शियल टैक्स को तत्काल समाप्त करने की मांग की गई।
पहले लगता था रिहायशी टैक्स, अब वसूला जा रहा कमर्शियल टैक्स
ज्ञापन में बताया गया कि शहर के कई स्कूल किराए के मकानों में संचालित हैं। पहले इन भवनों पर रिहायशी (रेजिडेंशियल) टैक्स लिया जाता था, लेकिन अब नगर निगम द्वारा इन्हें कमर्शियल श्रेणी में रखकर अधिक टैक्स वसूला जा रहा है, जिससे स्कूल संचालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
सरकार शिक्षा को बढ़ावा दे रही, टैक्स नीति बन रही बाधा
पदाधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विद्यार्थियों को निःशुल्क पुस्तकें, गणवेश, जूते तथा आरटीई के तहत 25 प्रतिशत बच्चों को मुफ्त शिक्षा जैसी योजनाएं संचालित कर रही है। ऐसे समय में स्कूलों पर कमर्शियल टैक्स लगाना शिक्षा को प्रोत्साहित करने की नीति के विपरीत है।
जल्द निर्णय की उम्मीद
ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मांग की गई है कि शिक्षा संस्थानों को कमर्शियल टैक्स से राहत दी जाए, ताकि स्कूलों पर आर्थिक बोझ कम हो और शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो। अब सभी की नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है।
