123 गांवों में 1.80 लाख लोगों तक पहुंचा बालको का सामुदायिक विकास अभियान

Anp News Live Korba किसी क्षेत्र का विकास केवल सड़क, भवन या अन्य निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं होता, बल्कि तब वास्तविक बदलाव दिखाई देता है जब लोगों की आय बढ़े, युवाओं को रोजगार मिले, महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हों, किसानों की खेती बेहतर हो और बच्चों को शिक्षा, पोषण एवं स्वास्थ्य की सुविधाएं मिलें। भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) की सामुदायिक विकास पहलों का फोकस इसी व्यापक बदलाव पर रहा है।

वित्तवर्ष 2026 में बालको की विभिन्न सामुदायिक पहलों का लाभ 123 गांवों के करीब 1.80 लाख लोगों तक पहुंचा। शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, महिला सशक्तिकरण, सामुदायिक अधोसंरचना और खेल के क्षेत्र में संचालित कार्यक्रमों के माध्यम से समुदाय की क्षमताओं को मजबूत करने का प्रयास किया गया।

जीवन के हर चरण पर विकास का फोकस

बालको की सामुदायिक विकास रणनीति मानव जीवन के विभिन्न चरणों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। प्रारंभिक बाल्यावस्था में पोषण और शिक्षा से लेकर स्कूली शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामुदायिक कल्याण तक अलग-अलग स्तरों पर पहल की गई।

इसी क्रम में 111 नंद घरों के माध्यम से बच्चों और माताओं को सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। 7,226 विद्यार्थियों को डिजिटल कक्षाओं का सहयोग मिला, जबकि 400 से अधिक विद्यार्थी शैक्षणिक एवं रचनात्मक गतिविधियों से जुड़े। 800 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रशिक्षण दिया गया। चिन्हित कुपोषित बच्चों में 75 प्रतिशत में स्वास्थ्य सुधार दर्ज किया गया।

शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों में डिजिटल कक्षाओं, रिमेडियल एजुकेशन और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया। बालको कनेक्ट कोचिंग कार्यक्रम के तहत कोरबा और कवर्धा में दो कोचिंग केंद्र संचालित किए गए। वित्तवर्ष 2026 में 84 अभ्यर्थियों का सरकारी परीक्षाओं में चयन हुआ।

आधुनिक तकनीक से खेती को मिला सहारा

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ‘मोर जल मोर माटी’ कार्यक्रम के जरिए जल सुरक्षा और आधुनिक कृषि को बढ़ावा दिया गया। यह पहल 40 गांवों के 9,420 किसानों तक पहुंची और 1,400 एकड़ से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई सुरक्षा को मजबूत किया गया।

किसानों को सूक्ष्म एवं लिफ्ट सिंचाई, उन्नत बीज, मिट्टी परीक्षण, कीट नियंत्रण और पोषक तत्व प्रबंधन जैसी तकनीकों की जानकारी दी गई। इसके परिणामस्वरूप 80 प्रतिशत किसानों ने आधुनिक और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाईं। उत्पादन में करीब 1.25 से 1.5 गुना वृद्धि, औसत कृषि आय में लगभग 50 प्रतिशत बढ़ोतरी और लागत में 25 से 30 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई। जल सुरक्षा से 3,000 से अधिक किसान दूसरी और तीसरी फसल लेने लगे।

कौशल प्रशिक्षण से रोजगार की राह

ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए वेदांता स्किल स्कूल के कोरबा, कवर्धा और सरगुजा स्थित तीन केंद्रों में वित्तवर्ष 2026 के दौरान 1,202 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया। इनमें से 82 प्रतिशत युवा रोजगार या उद्यमिता से जुड़े।

प्रशिक्षण में महिलाओं की भागीदारी 61 प्रतिशत रही, जबकि 59 प्रतिशत प्रतिभागी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों से थे। तकनीकी प्रशिक्षण के साथ व्यक्तित्व विकास, एआई तकनीक, औद्योगिक भ्रमण, सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े सत्र भी आयोजित किए गए।

महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने पर जोर

उन्नति परियोजना के तहत महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों, वित्तीय समावेशन और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में काम किया गया। वित्तवर्ष 2026 में 40 नए स्वयं सहायता समूह बने, जिससे कुल संख्या 561 समूह और 6,003 महिलाओं तक पहुंच गई।

इनमें 2,259 महिलाएं आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी हैं। समूहों की सामूहिक बचत 92 लाख रुपये तक पहुंची। 19 समूहों को बैंक से जोड़ा गया और करीब 27 लाख रुपये का ऋण सहयोग मिला।

उनाटेक्स, डेकोराती, छत्तीसा, क्लिनला, मशरूम उत्पादन और कोसाकारी जैसे उद्यमों से 600 से अधिक महिलाएं जुड़ीं और करीब 20 लाख रुपये का राजस्व अर्जित हुआ। 21 सूक्ष्म उद्यमों के जरिए 104 महिलाओं को अवसर मिला।

कोसा बुनाई को बाजार से जोड़ने की पहल

छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कोसा कला को नए बाजार से जोड़ने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में ‘कोसाकारी’ पहल शुरू की गई। धनगांव में कोसा बुनाई प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर 20 महिला बुनकरों को प्रशिक्षण दिया गया। ‘कोसाकारी’ ब्रांड और डिजिटल मंच के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने का प्रयास किया गया।

स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ी

आरोग्य परियोजना के माध्यम से वित्तवर्ष 2026 में 93,442 लोगों तक सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचीं। तीन ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में 4,799 मरीजों को ओपीडी सेवाएं मिलीं।

65 आंगनबाड़ियों में 3,340 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई और 915 कुपोषित बच्चों की पहचान हुई। इनमें 95 प्रतिशत बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार दर्ज किया गया। वहीं 2,310 महिलाओं की एनीमिया जांच की गई, जिसमें 92 प्रतिशत महिलाओं के हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार हुआ। मोबाइल स्वास्थ्य वाहनों के जरिए 70 बस्तियों में 26,500 लोगों तक सेवाएं पहुंचीं।

नवा रायपुर स्थित बालको मेडिकल सेंटर में भी सामुदायिक विकास सहायता के तहत 17,290 मरीजों ने उपचार सेवाओं का लाभ लिया। इस दौरान 2,800 सर्जरी, 16,891 कीमोथेरेपी और 1,635 रेडियोथेरेपी उपचार किए गए। केंद्र में दा विंची एक्सआई रोबोट आधारित कैंसर शल्य चिकित्सा प्रणाली भी स्थापित की गई।

सामुदायिक सुविधाओं और खेल को भी बढ़ावा

वित्तवर्ष 2026 में बालको ने 4 सामुदायिक भवन, 12 सामुदायिक शौचालय और 2 सामुदायिक मंच बनाए, जिससे 7,500 से अधिक लोगों को लाभ मिला। इन सुविधाओं से सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर स्थान उपलब्ध हुए।

युवाओं की खेल प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिए लक्ष्यवेद-बालको तीरंदाजी कार्यक्रम शुरू किया गया। 29 स्कूलों में प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। 1,200 से अधिक विद्यार्थियों की जांच के बाद 70 प्रतिभागियों ने चयन परीक्षण में सफलता हासिल की।

आंकड़ों से आगे दिख रहा बदलाव

बालको की सामुदायिक विकास पहल का प्रभाव केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि किसानों, महिलाओं, युवाओं, बच्चों और परिवारों के जीवन में आए बदलावों में दिखाई देता है। आधुनिक खेती से बढ़ती आय, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार, बच्चों के लिए बेहतर सीखने का वातावरण और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती पहुंच इस प्रयास के प्रमुख परिणाम हैं।

बालको की पहल का उद्देश्य समुदाय को केवल योजनाओं का लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि लोगों को अपनी क्षमताओं के बल पर आगे बढ़ने के लिए सक्षम बनाना है। सामुदायिक भागीदारी, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के माध्यम से स्थायी सामाजिक बदलाव की दिशा में यह प्रयास निरंतर आगे बढ़ रहा है।

Related Post