चकुंडा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का घूमधाम से हुआ समापन,नम आँखों से दी भाव भीनी विदाई 

चकुंडा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का घूमधाम से हुआ समापन,नम आँखों से दी भाव भीनी विदाई 

 

श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन का आयोजन रामजानकी मंदिर परिसर चकुंडा में अत्यंत भव्य, भावपूर्ण और आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। कथा का वाचन पंडित सत्यनारायण शर्मा द्वारा किया गया, जिन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक और विस्तारपूर्वक वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

Uploaded Image

इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा के प्रत्येक प्रसंग में पूरी आस्था और श्रद्धा से डूबते दिखाई दिए।

कथावाचक ने सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा प्रस्थान का प्रसंग सुनाया। जब कृष्ण और बलराम गोकुल व वृंदावन छोड़कर मथुरा की ओर प्रस्थान करते हैं, तो वहां के लोगों की पीड़ा और कंस के अत्याचारों का जीवंत चित्रण श्रोताओं के सामने किया गया। इसके बाद कंस वध की कथा का अत्यंत प्रभावशाली वर्णन हुआ, जिसमें भगवान कृष्ण ने अन्याय और अत्याचार का अंत कर धर्म और सत्य की स्थापना की। यह प्रसंग उपस्थित जनसमूह को यह संदेश देता है कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान स्वयं अवतार लेकर धर्म की रक्षा करते हैं।Uploaded Image

आगे कथा में महर्षि संदीपनी के आश्रम का वर्णन आया, जहां श्रीकृष्ण और बलराम ने वेद, शास्त्र और विभिन्न विद्याओं का अध्ययन किया। यह प्रसंग शिक्षा और ज्ञान के महत्व का स्मरण कराता है और जीवन में गुरु के स्थान की महत्ता को रेखांकित करता है। तत्पश्चात कालयवन वध की कथा सुनाई गई। अंत में कथा वाचक पंडित सत्यनारायण शर्मा को नम आँखों से भाव भीनी विदाई दी गई।

Related Post