नारंगी नदी पुल के पास फैले कचरे से उठ रही सड़न की बदबू से राहगीर परेशान, नगर पालिका की लापरवाही से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर संकट

कोंडागांव, 27 सितंबर 2025: जिला मुख्यालय कोंडागांव में नगर पालिका प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आई है। नारंगी नदी पुल के पास राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-30) के किनारे महीनों से शहर का कचरा खुले में डंप किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में तीव्र सड़न और बदबू का माहौल बन गया है। इस बदबू से राहगीरों के साथ-साथ आसपास के रहवासियों का जीना मुश्किल हो गया है।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां यह कचरा डाला जा रहा है, वह स्थान नारंगी नदी के ठीक किनारे है। यह नदी न केवल कोंडागांव की जीवनदायिनी मानी जाती है, बल्कि कई ग्रामीण इलाकों की जल जरूरतों को भी पूरा करती है। बारिश के मौसम में यह कचरा नदी में बह जाता है, जिससे पानी प्रदूषित हो रहा है और ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

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नगरपालिका द्वारा इस संवेदनशील क्षेत्र को डंपिंग ज़ोन में बदलने से शहर की छवि पर भी बुरा असर पड़ रहा है। NH-30 से गुजरने वाले बाहरी लोग जब बदबू और गंदगी के बीच से शहर में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें कोंडागांव की तस्वीर एक गंदे शहर की तरह नजर आती है।

 

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस स्थिति पर कड़ी आपत्ति जताई है। लोगों की मांग है कि नगर पालिका तत्काल प्रभाव से इस स्थान पर कचरा फेंकना बंद करे और कचरा प्रबंधन के लिए किसी उचित व वैज्ञानिक मानकों पर आधारित स्थान का चयन करे।

 

जनता ने नगर पालिका पर लगाया गंभीर आरोप

लोगों का कहना है कि प्रशासन की यह लापरवाही आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ है। न तो कचरे को ढंकने की व्यवस्था है, न ही किसी प्रकार की प्रसंस्करण सुविधा। इससे मच्छरों, गंदगी और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

 

क्या कहता है पर्यावरणीय नियम?

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और नगरपालिका नियमों के अनुसार किसी भी जल स्रोत के 500 मीटर के दायरे में कचरा डंप करना प्रतिबंधित है। बावजूद इसके, नारंगी नदी के किनारे खुलेआम यह नियम तोड़ा जा रहा है।

 

अब देखना होगा कि जनता की आवाज और मीडिया की रिपोर्टिंग के बाद नगर पालिका प्रशासन इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाता है।

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