जिला कलेक्टर ने किया उद्यान विभाग की योजनाओं के अंतर्गत संचालित गतिविधियों का निरीक्षण
अब गांवों में भी खिल रही है उन्नत खेती की हरियाली- संरक्षित खेती से कृषक बन रहे आत्मनिर्भर, कमा रहे लाखों रुपये
प्रतापगढ़, 04 नवम्बर। जिला कलेक्टर एवं जिला उद्यान विकास समिति की अध्यक्ष डॉ. अंजलि राजोरिया ने मंगलवार को उद्यान विभाग की योजनाओं के अंतर्गत संचालित गतिविधियों का निरीक्षण किया गया। इस अवसर पर उद्यान विभाग के उप निदेशक रामकिशन वर्मा उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान जिला कलक्टर ने प्रतापगढ़ पंचायत समिति के खेरोट ग्राम में कृषक गोपाल पुत्र अम्बालाल पाटीदार के खेत पर निर्मित संरक्षित खेती संरचना (पॉली हाउस) का अवलोकन किया। उन्होंने कृषक परिवार से पॉलीहाउस निर्माण की लागत, फसल उत्पादन व आय से संबंधित जानकारी ली।कृषक श्री गोपाल ने बताया कि खीरे की फसल की अवधि लगभग चार माह होती है, जिससे 20 से 25 टन उत्पादन प्राप्त होता है। बाजार भाव के अनुसार इससे लगभग 4 से 5 लाख रुपये की आय होती है। उन्होंने बताया कि पॉलीहाउस के माध्यम से जलवायु नियंत्रण, कीट प्रबंधन एवं सिंचाई की सुविधा से उत्पादन की गुणवत्ता में वृद्धि हुई है।
इसके उपरांत जिला कलेक्टर ने आरकेवीवाई योजना के अंतर्गत कृषक शंभुलाल पुत्र प्रभुलाल पाटीदार के खेत पर निर्मित पॉलीहाउस का निरीक्षण किया, जहाँ रंगीन शिमला मिर्च (लाल ‘इब्राहिम’ व पीली ‘रहिना’ किस्म) की खेती की जा रही है। कृषक ने बताया कि फसल की अवधि 8 से 10 माह की होती है और औसतन 10 से 12 टन उत्पादन प्राप्त होने की संभावना है। बाजार मूल्य के अनुसार इससे लगभग 10 लाख रुपये की आय संभावित है। कृषक शंभुलाल ने यह भी बताया कि उन्होंने पीएम-कुसुम योजना के तहत अपने कुएँ पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया है, जिससे सिंचाई के लिए वे ऊर्जा आत्मनिर्भर बन गए हैं। इससे उनकी लागत में कमी आई है और लाभ में वृद्धि हुई है।
सरकारी सहायता से विदेश जाकर सीखी उन्नत कृषि, पशुपालन तकनीक एवं वैज्ञानिक खेती पद्धतियां
उल्लेखनीय है कि कृषक श्शंभुलाल को विभागीय विदेश अध्ययन भ्रमण योजना के अंतर्गत 13 से 19 अक्टूबर 2025 तक डेनमार्क देश का भ्रमण करने का अवसर मिला। उन्होंने वहाँ की उन्नत कृषि, पशुपालन तकनीक एवं वैज्ञानिक खेती पद्धतियों के अनुभव साझा करते हुए कहा कि ऐसे अनुभव भारतीय किसानों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। जिला कलेक्टर ने कहा कि संरक्षित खेती, सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई एवं तकनीकी नवाचारों से किसान तेजी से प्रगति कर रहे हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं का अधिकाधिक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक पात्र किसानों को इसका लाभ दिलाया जाए।
